शिक्षा ही पसमांदा समाज की सबसे बड़ी ताक़त : शारिक अदीब अंसारी

नई दिल्ली। ऑल इंडिया पसमान्दा मुस्लिम महाज़ के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष शारिक अदीब अंसारी ने पसमांदा मुस्लिम बच्चों और युवाओं से शिक्षा को जीवन की प्राथमिकता बनाने की भावुक और सशक्त अपील की है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में मेहनत और मज़दूरी से ज़्यादा ज्ञान और शिक्षा ही तरक्क़ी की असली कुंजी है।

अपने संदेश में उन्होंने कहा कि यदि कोई बच्चा आज पढ़ाई के लिए समय नहीं निकालता, तो उसे भविष्य में कठिन और असुरक्षित मज़दूरी के लिए तैयार रहना पड़ेगा। उन्होंने शिक्षा को केवल रोज़गार का साधन नहीं, बल्कि सम्मान, आत्मनिर्भरता और सामाजिक बदलाव का माध्यम बताया।

शारिक अदीब अंसारी ने कहा कि पसमांदा मुस्लिम समाज के अधिकांश परिवार पारंपरिक पेशों और कठिन श्रम से जुड़े हैं, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि आने वाली पीढ़ी भी उसी दायरे में सिमटी रहे। उन्होंने कहा कि शिक्षा दर्ज़ी के बेटे को डिज़ाइनर, मज़दूर के बेटे को वैज्ञानिक और बेटियों को नेतृत्वकर्ता बना सकती है।

उन्होंने इस्लाम की शिक्षा पर ज़ोर देते हुए कहा कि पहला संदेश ही “इक़रा” यानी पढ़ने का आदेश था और पैग़म्बर मोहम्मद (स.अ.व.) ने इल्म को हर मुसलमान पर फ़र्ज़ बताया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा न केवल दुनियावी ज़रूरत है, बल्कि धार्मिक और नैतिक ज़िम्मेदारी भी है।

शारिक अदीब अंसारी ने चिंता व्यक्त की कि जो बच्चे कम उम्र में पढ़ाई छोड़ देते हैं, वे अक्सर असंगठित क्षेत्र में असुरक्षित काम करने को मजबूर हो जाते हैं, जहाँ न स्थिर आमदनी होती है और न भविष्य की सुरक्षा। इसके विपरीत, पढ़ाई और कौशल विकास के माध्यम से बच्चे शिक्षक, नर्स, तकनीशियन, शोधकर्ता और अधिकारी बन सकते हैं।

उन्होंने बच्चों और युवाओं को सलाह दी कि वे पढ़ाई के लिए समय निर्धारित करें, मोबाइल गेम और अनावश्यक सोशल मीडिया से दूरी बनाएँ, और घर के किसी कोने को भी अध्ययन स्थल बना लें। साथ ही उन्होंने छात्रवृत्तियों, डिजिटल शिक्षण प्लेटफॉर्म और सामाजिक संस्थाओं द्वारा उपलब्ध सहायता का लाभ उठाने का आह्वान किया।

अपने संदेश के अंत में उन्होंने कहा कि पसमांदा समाज के बच्चे किसी से कम नहीं हैं और यदि उन्हें अवसर, मार्गदर्शन और आत्मविश्वास मिले, तो वे न केवल अपना बल्कि पूरे समाज का भविष्य बदल सकते हैं।