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उत्सव की कीमत: ईद, गरिमा और भुला दिए गए गरीब

उत्सव हर समाज में एक विशेष स्थान रखते हैं। वे खुशी, नवीनीकरण और सामूहिक जुड़ाव के क्षण होते हैं। वे परिवारों और समुदायों को एक […]

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रमज़ान: इबादत का महीना, न कि रात-भर खुले बाज़ारों और अतिशय उपभोग का समय

रमज़ान इस्लामी परंपरा में आत्मचिंतन, अनुशासन और गहरी आध्यात्मिकता का महीना माना जाता है। एक मुसलमान होने के नाते और अपने समाज की नैतिक दिशा […]

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ग़ाज़ी-ए-मिल्लत, फ़ख़्र-ए-क़ौम अब्दुल क़यूम अंसारी साहब

ग़ाज़ी-ए-मिल्लत, फ़ख़्र-ए-क़ौम मोहतरम अब्दुल क़यूम अंसारी साहब (1905–1973) एक युग, एक विचार, एक आंदोलन मोहतरम अब्दुल क़यूम अंसारी साहब (1 जुलाई 1905 – 18 जनवरी […]

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आधुनिक इतिहास में मुसलमानों की सबसे बड़ी कातिल पाकिस्तानी सेना

पाकिस्तान की उत्पत्ति को आम तौर पर हिंदुस्तानी मुसलमानों में पैन-इस्लामिक जोश का एक अनिवार्य उभार बताया जाता है। यह वह मिथकीय कथा है जो […]

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गांधी मैदान पटना की कॉफी : पसमान्दा राजनीति का एक सबक

कुछ महीने पहले, जब मैं पटना में था, तो मैं एक वरिष्ठ कांग्रेसी नेता के साथ कैफ़े कॉफी डे में बैठा था, जो ऐतिहासिक गांधी […]

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जाति की जंजीरों को तोड़ना: पासमांदा मुसलमानों का समावेशी नेतृत्व की ओर संघर्ष

भारत के विविध मुस्लिम समाज के हृदय में एक असहज सच्चाई छिपी हुई है — एक गहराई तक जमी हुई जातिगत संरचना, जो न केवल […]

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बँटवारे का दर्द, सत्ता का लालच और पसमांदा का संघर्ष

“पसमांदा की असली लड़ाई — धर्म नहीं, बराबरी और इंसाफ़ की लड़ाई है” “धर्म के नाम पर सत्ता की राजनीति ने पसमांदा समाज को सबसे […]

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कट्टरपंथ को रोकने में समुदाय की भूमिका

कट्टरपंथ हमारे समय की सबसे जटिल चुनौतियों में से एक बनकर उभरा है, जो जातीय, धार्मिक और राजनीतिक सीमाओं से परे समाजों को प्रभावित कर […]

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