एनएसए अजीत डोभाल के भाषण पर AIPMM की सामाजिक सद्भाव की अपील

भ्रामक प्रचार से बचे समाज: पसमांदा मुस्लिम महाज़

सामाजिक सद्भाव बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी: AIPMM

नई दिल्ली। हाल ही में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) श्री अजीत डोभाल ने दिल्ली में आयोजित “विकसित भारत-युवा लीडर्स डायलॉग” कार्यक्रम में, जो स्वामी विवेकानंद की विचारधारा से प्रेरित था, देश के युवाओं को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए दिए गए ऐतिहासिक बलिदानों, विदेशी आक्रमणों, अपमानजनक घटनाओं, मंदिरों के विध्वंस तथा भारतीय सभ्यता पर पड़े दीर्घकालिक प्रभावों का उल्लेख करते हुए युवाओं से इतिहास से सीख लेने और राष्ट्र को सशक्त बनाने का आह्वान किया।
भाषण के दौरान श्री डोभाल ने “प्रतिशोध” (त्मअमदहम) शब्द का प्रयोग किया, किंतु उन्होंने स्वयं यह स्पष्ट किया कि यह शब्द उपयुक्त नहीं है। उनका आशय किसी व्यक्ति, समुदाय या धर्म के विरुद्ध बदले की भावना से नहीं था, बल्कि इतिहास की पीड़ा और कष्टों को सकारात्मक ऊर्जा में परिवर्तित कर भारत को आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, सामरिक एवं वैचारिक रूप से सशक्त राष्ट्र बनाने से था। उन्होंने कहा- ;त्मअमदहम पे दवज ं हववक ूवतक, इनज पज बंद इम ं ीनहम वितबमद्ध अर्थात् लक्ष्य देश को उसकी मूल विचारधारा, आत्मसम्मान और आत्मविश्वास के आधार पर आगे बढ़ाना है। दुर्भाग्यवश, सोशल मीडिया तथा अन्य मध्यम पर कुछ लोगों द्वारा इस वक्तव्य को संदर्भ से अलग कर राजनीतिक कारणों से मुस्लिम समाज, विशेषकर भारतीय मुसलमानों, के विरुद्ध बदले की भावना के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, जो तथ्यात्मक रूप से पूरी तरह गलत, भ्रामक और दुर्भावनापूर्ण है। श्री डोभाल ने अपने पूरे भाषण में किसी भी धर्म, समुदाय या संप्रदाय का नाम नहीं लिया। उनका संदर्भ ऐतिहासिक “बाहरी आक्रांताओं” और आक्रमणकारी शक्तियों से था, जिनमें विभिन्न पृष्ठभूमियों के लोग शामिल रहे हैं, चाहे वे किसी भी धर्म से संबंधित रहे हों। वर्तमान भारतीय मुसलमानों को इससे जोड़ना न केवल असत्य है, बल्कि सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता को नुकसान पहुँचाने वाला भी है।
आल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज इस बात पर दृढ़ता से बल देता है कि ऐतिहासिक विमर्श में सामाजिक विविधता, वर्गीय यथार्थ और समावेशी दृष्टिकोण को सदैव ध्यान में रखा जाना चाहिए। श्री अजीत डोभाल एक अनुभवी, राष्ट्रभक्त और जिम्मेदार संवैधानिक पदाधिकारी हैं। पूर्व में, विशेषकर वर्ष 2014 में, उन्होंने भारतीय मुसलमानों की देशभक्ति की खुलकर प्रशंसा की थी और यह कहा था कि भारतीय मुसलमान किसी भी अन्य नागरिक से कम राष्ट्रवादी नहीं हैं तथा आतंकवाद के विरुद्ध देश के साथ मजबूती से खड़े हैं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने विभिन्न मुस्लिम देशों में कार्य करते हुए भारत के हितों की रक्षा और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह सब स्पष्ट करता है कि उनका हालिया संबोधन राष्ट्र सुरक्षा, युवा चेतना और राष्ट्र निर्माण के व्यापक संदर्भ में था, न कि किसी समुदाय के विरुद्ध।
आल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज एक राष्ट्रवादी सामाजिक संगठन है, जो भारतीय मूल के लगभग 85 प्रतिशत पसमांदा मुस्लिम समाज को शिक्षा, सामाजिक न्याय, आर्थिक सशक्तिकरण और राष्ट्रहित की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। संगठन सभी जिम्मेदार सार्वजनिक व्यक्तियों, राजनीतिक दलों और सामाजिक मंचों से यह अपेक्षा करता है कि वे अपने वक्तव्यों और व्याख्याओं में तथ्यपरकता, संवेदनशीलता और संतुलन बनाए रखें, ताकि समाज में भ्रम, अविश्वास या वैमनस्य का वातावरण न बने।
-सामाजिक सद्भाव, राष्ट्रीय एकता और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा ही हमारा संकल्प है।