लखनऊ में बाबा-ए-कौम अब्दुल कय्यूम अंसारी की जयंती मनाई गई

टू-नेशन थ्यूरी के प्रखर विरोधी थे अब्दुल कय्यूम अंसारीः डाॅ. फैयाज

अब्दुल कय्यूम अंसारी ने सामाजिक बराबरी की अलख जगाई: अनूप पटेल

स्वतंत्रता सेनानी अब्दुल कय्यूम अंसारी के विचारों को आगे बढ़ाने का संकल्प
पसमांदा आंदोलन के पुरोधा अब्दुल कय्यूम अंसारी की जयंती पर कार्यक्रम
मुस्लिम लीग के विरोध और मोमिन आंदोलन पर डाला गया प्रकाश
जयंती कार्यक्रम में संगठन के पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद
अब्दुल कय्यूम अंसारी के संघर्षों को याद कर लिया गया संकल्प

लखनऊ। आज लखनऊ स्थित आल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज के राष्ट्रीय कार्यालय पर बाबा-ए-कौम अब्दुल कय्यूम अंसारी जी जयंती मनाई गई, जिसकी अध्यक्षता डाॅ. फैयाज अहमद फैजी ने की। उन्होंने कहा अब्दुल कय्यूम अंसारी व व्यक्ति हैं जिन्होंने स्वतंत्रता आंदालेन में बढ़-चढ़ कर भाग लिया है। अब्दुल कय्यूम अंसारी बीसवीं सदी के भारत के एक प्रख्यात राष्ट्रवादी और जननेता थे, जिनका राष्ट्रवाद में योगदान ऐतिहासिक है। उनका जन्म 1 जुलाई 1905 को बिहार के तत्कालीन शाहाबाद (वर्तमान रोहतास) जिले के डेहरी-ऑन-सोन में हुआ। वे श्री मोहम्मद अब्दुल हक और सफिया बेगम के पुत्र थे। उन्होंने सासाराम और डेहरी हाई स्कूल, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, कलकत्ता यूनिवर्सिटी और इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से शिक्षा प्राप्त की। हालांकि, राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भागीदारी के कारण वे अपनी विश्वविद्यालयी शिक्षा पूरी नहीं कर सके।
अब्दुल कय्यूम अंसारी एक पारंपरिक कृषक परिवार से थे और 1919 से ही भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से निकटता से जुड़े हुए थे। मात्र 15 वर्ष की आयु में उन्होंने जून 1920 में इलाहाबाद में आयोजित सर्वदलीय नेताओं के सम्मेलन में भाग लिया, जिसमें महात्मा गांधी के नेतृत्व में अंग्रेजी सरकार के विरुद्ध असहयोग आंदोलन को स्वीकृति दी गई और 1 अगस्त 1920 से इसे प्रारंभ करने का निर्णय हुआ।
महात्मा गांधी द्वारा प्रस्तुत ऐतिहासिक असहयोग प्रस्ताव पारित किया गया, जिसका उद्देश्य भारत को ब्रिटिश शासन से मुक्त कराना और खिलाफत आंदोलन का समर्थन करना था। उन्होंने अपने साथियों के साथ डेहरी-ऑन-सोन के सरकारी स्कूल को छोड़ दिया और कांग्रेस के निर्णय के अनुरूप एक राष्ट्रीय विद्यालय की स्थापना की, जहाँ सरकारी स्कूलों का बहिष्कार करने वाले छात्रों को शिक्षा दी जाती थी।
1921 में मात्र 16 वर्ष की आयु में, अंग्रेज विरोधी असहयोग और खिलाफत आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाने के कारण उन्हें डेहरी-ऑन-सोन में गिरफ्तार किया गया।
अब्दुल कय्यूम अंसारी ने मुस्लिम लीग की सांप्रदायिक राजनीति और भारत के विभाजन के माध्यम से पाकिस्तान बनाने की माँग का खुलकर विरोध किया। ‘दो-राष्ट्र सिद्धांत’ और मुस्लिम लीग की सांप्रदायिक नीति के प्रतिरोध में तथा सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक रूप से पिछड़े मोमिन समुदाय के उत्थान और मुक्ति के उद्देश्य से उन्होंने 1937-38 में मोमिन आंदोलन की शुरुआत एक राजनीतिक संगठन के रूप में की। इस आंदोलन ने मुस्लिम लीग को मोमिन समुदाय, जो भारतीय मुस्लिम आबादी का एक बड़ा हिस्सा है, में अपनी जड़ें जमाने से रोका।
इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डाॅ. अनूप पटेल जी व विशिष्ट अतिथि अधिवक्ता राहुल देव जी रहे। इस अवसर पर अनूप पटेल ने कहा हमें अपने आइकाॅन को हमेशा याद रखने की जरूरत है अब्दुल कय्यूम अंसारी जी ने जो सामाजिक बराबरी के लिये अलख जलाई है उसे किसी कीमत पर बुझने नहीं देना है। अपनी मांगों को लगातार सरकारों से करते रहे। इस अवसर पर राष्ट्रीय सलाहकार डाॅ. फैयाज अहमद फैजी, प्रदेश महासचिव मो. इलियास, लखनऊ जिला अध्यक्ष फैज मोहम्मद, जिला उपाध्यक्ष जफर आलम, कार्यालय सचिव एहतेशाम, ब्लाक संरक्षक शकील लेड़ी, अफ्फान अंसारी आदि लोग मौजूद रहे।