विजयी प्रत्याशियों को बधाई, हारने वालों से जनादेश सम्मान की अपील
चुनाव बाद कटुता खत्म कर सामाजिक सौहार्द बढ़ाने का आह्वान
असम-बंगाल में ‘भय की राजनीति’ को मुस्लिम समाज ने किया खारिज
सत्ता परिवर्तन में पसमांदा समाज की अहम भूमिका: महाज
डर और नफरत की राजनीति से दूर रहने की अपील
शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा पर फोकस करने का संदेश
अशराफ साजिशों से ऊपर उठने की जरूरत: पसमांदा महाज
गंगा-जमुनी संस्कृति मजबूत करने का आह्वान
विजयी नेताओं को बधाई, नए मुख्यमंत्रियों को अग्रिम शुभकामनाएं
आल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़ पाँच राज्यों में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा होने पर प्रसन्नता व्यक्त करता है। हम सभी विजयी प्रत्याशियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हैं। पराजित प्रत्याशियों से अपील करते हैं कि वे जनादेश का सम्मान करें और मजबूत लोकतंत्र की परंपरा को बनाए रखें।
चुनाव समाप्त होने के साथ अब आपसी कटुता, आरोप-प्रत्यारोप और बयानबाजी को समाप्त कर देश में सामाजिक न्याय, समरसता, सौहार्द और संवैधानिक मूल्यों को सर्वोपरि रखते हुए उदारता एवं बड़ी सोच का परिचय दें। सत्ता परिवर्तन लोकतंत्र की सुंदर पहचान है। विपक्ष में रहते हुए अपनी गलतियों का विश्लेषण कर जनसेवा को प्रमुख लक्ष्य बनाएं। जिन दलों के प्रत्याशी हारे हैं, वे अपनी हार को शालीनता से स्वीकार करें, हार के कारणों का गंभीर विश्लेषण करें और भविष्य के लिए ठोस कदम उठाएं।
संगठन का स्पष्ट मत: कुछ स्वार्थी तत्व मुसलमानों के बीच, खासकर असम और पश्चिम बंगाल जैसे मुस्लिम बहुल राज्यों में भय और भ्रम का माहौल बनाकर एक विशेष राजनीतिक दिशा में वोटिंग कराने की कोशिश करते रहे। परंतु बंगाल और असम की मुस्लिम जनता ने उन्हें स्पष्ट रूप से अस्वीकार कर दिया। इन चुनावों में पसमांदा कामगार मुस्लिम समाज का भी सत्ता परिवर्तन में महत्वपूर्ण योगदान रहा।
पसमांदा मुस्लिम समाज से विशेष अपील: पसमांदा मुस्लिम महाज़ एक अराजनैतिक सामाजिक संगठन है। हमारा स्पष्ट मत है कि जातिगत बंटवारे और अशराफ साजिशों से ऊपर उठकर उपेक्षित वर्ग को अब अपने बच्चों की शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और समग्र विकास को प्राथमिकता देनी चाहिए। अनावश्यक विवादों, भावनात्मक उत्तेजना और परंपरागत सियासी साजिशों से बचना समाज तथा विकसित राष्ट्र के हित में है।
लंबे समय से सीयासी और धार्मिक नेतृत्व द्वारा डर, असुरक्षा और भड़काऊ राजनीति के जरिए केवल वोट बैंक बनाने का काम किया गया, लेकिन आम मुसलमानों के बुनियादी विकास के लिए कोई ठोस कार्य नहीं हुआ। पश्चिम बंगाल का उदाहरण स्पष्ट है कि लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद समाज के एक बड़े वर्ग की विकास संबंधी अपेक्षाओं की अनदेखी की गई।
संगठन का संदेश:
– किसी भी दल या प्रत्याशी के पक्ष-विपक्ष में केवल डर या नफरत के आधार पर वोट न करें। यह अल्पसंख्यक समाज के लिए आत्मघाती साबित हो रहा है।
– अपने और अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा को प्राथमिकता दें।
– सांप्रदायिक भावनाओं और भड़काऊ नारों से दूर रहें। पसमांदा (85%) समाज को विकास के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
– अशिक्षा और जागरूकता के अभाव का फायदा उठाकर गुमराह करने वाली राजनीति से पूरी तरह बचें।
– 85% बहुसंख्यक हिंदू समाज के साथ परंपरागत गंगा-जमुनी संस्कृति को मजबूत करें।
– केंद्र और राज्य सरकारों से समन्वय बनाकर पसमांदा मुस्लिम समाज के शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा के मुद्दों पर काम किया जाए।
अंत में, आल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़ सभी विजयी प्रत्याशियों को पुनः हार्दिक बधाई देता है और शीघ्र शपथ ग्रहण करने वाले मुख्यमंत्रियों को अग्रिम शुभकामनाएं प्रेषित करता है। हम आशा करते हैं कि नई गठित सरकारें वंचित, दबे-कुचले और पसमांदा मुस्लिम समाज के सामाजिक न्याय, शिक्षा, अधिकारिता एवं आर्थिक विकास के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाएंगी तथा पसमांदा समाज के उत्थान हेतु योजनाओं के निर्माण और क्रियान्वयन में पूर्ण सहयोग प्रदान करेंगी।

