पसमांदा मुद्दों पर किसी ने पहले ध्यान नहीं दिया : हाजी ताहिर हुसैन

पसमांदा विमर्श अब राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा बन चुका है : हाजी ताहिर हुसैन
अपने हक़ और विकास के लिए वोट देने की जरूरत : हाजी ताहिर
पसमांदा समाज को शिक्षा और अधिकारों के प्रति जागरूक होना होगा

मुरादाबाद। आज मुरादाबाद में ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़ की एक विशेष बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष हाजी ताहिर हुसैन ने की। बैठक में संगठन के विस्तार, पसमांदा समाज की वर्तमान स्थिति और भविष्य की रणनीति पर गंभीर चर्चा की गई।

अपने संबोधन में हाजी ताहिर हुसैन ने कहा कि आज पसमांदा विमर्श केवल प्रदेश स्तर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह राष्ट्रीय स्तर का विषय बन चुका है। उन्होंने कहा कि ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़ की लगातार मुहिम के परिणामस्वरूप आज देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भी पसमांदा समाज का उल्लेख किया जाना इस बात का प्रमाण है कि पसमांदा मुद्दा अब राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बन गया है।

हाजी ताहिर ने उन आरोपों पर भी प्रतिक्रिया दी, जिनमें यह कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री मुसलमानों में फूट डालना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि कोई यह बताए कि इससे पहले किसी भी प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री ने पसमांदा मुसलमानों की समस्याओं पर कभी ध्यान दिया हो। उन्होंने कहा कि यह भी एक सच्चाई है कि मुसलमान भाजपा को वोट नहीं देते, इसके बावजूद प्रधानमंत्री द्वारा पसमांदा समाज की बात करना एक सकारात्मक संकेत है।

उन्होंने कहा कि अब तक जिन तथाकथित सेक्युलर दलों को पसमांदा मुसलमान वोट देते आए हैं, उन्होंने कभी पसमांदा समाज की शिक्षा, रोजगार और सामाजिक स्थिति पर गंभीरता से काम नहीं किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी विशेष राजनीतिक दल का समर्थन करना नहीं है, बल्कि पसमांदा समाज को यह समझाना है कि वोट अपने अधिकार और विकास के लिए दिया जाना चाहिए, न कि सिर्फ परंपरा के आधार पर।

हाजी ताहिर हुसैन ने पसमांदा समाज की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज समाज की हालत कई मामलों में दलित समाज से भी बदतर हो चुकी है, जिसकी पुष्टि विभिन्न समाचार पत्रों और रिपोर्टों में भी हो चुकी है। उन्होंने समाज को शिक्षा, अधिकारों और आत्मसम्मान के प्रति जागरूक होने की अपील की।

बैठक में संगठन के कार्यकर्ताओं से समाज के बीच जाकर काम करने, लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने और शिक्षा को प्राथमिकता देने का आह्वान किया गया।

इस अवसर पर मुहम्मद फारूक, मो. परवेज, कफील, मुम्ताज सहित बड़ी संख्या में पसमांदा कार्यकर्ता उपस्थित रहे।