मोहन भागवत जी से संवाद करें मेयर ज़ोहरान ममदानी : ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़

भारत के मुसलमानों के हित में संवाद और प्रत्यक्ष बातचीत जरूरी : पसमांदा मुस्लिम महाज़

नई दिल्ली।  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक श्री मोहन भागवत जी अमेरिका के दौरे पर हैं और 29 अगस्त 2026 को न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित “Universal Oneness Celebration” कार्यक्रम को संबोधित करने वाले हैं। कार्यक्रम को लेकर न्यूयॉर्क के मेयर श्री ज़ोहरान ममदानी ने अपनी असहमति और विरोध सार्वजनिक रूप से व्यक्त किया है।

ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़ के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री परवेज़ हनीफ़ और CEO श्री मुहम्मद यूनुस ने मेयर ममदानी से अपील की है कि वे श्री मोहन भागवत जी से मुलाकात कर भारत, भारतीय मुसलमानों और सामाजिक सौहार्द से जुड़े अपने सवाल एवं चिंताएँ सीधे उनके सामने रखें। राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री परवेज़ हनीफ़ ने कहा, “हम मेयर ज़ोहरान ममदानी जी से आग्रह करते हैं कि वे श्री मोहन भागवत जी से मिलें और भारत के मुसलमानों से जुड़े अपने प्रश्न सीधे उनके सामने रखें। लोकतंत्र में संवाद का अर्थ सहमति नहीं, बल्कि एक-दूसरे को सुनना और समझना है।” श्री हनीफ़ ने कहा कि भारत में मुसलमानों के सामने समस्याएँ और चुनौतियाँ हैं, जिन पर गंभीरता से बात होनी चाहिए, लेकिन भारत के मुसलमानों की पूरी तस्वीर केवल नकारात्मक खबरों या कुछ घटनाओं से नहीं समझी जा सकती। भारत एक विविधतापूर्ण देश है, जहाँ करोड़ों मुसलमान सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक और राष्ट्रीय जीवन में योगदान दे रहे हैं।

उन्होंने कहा कि RSS और श्री मोहन भागवत जी के साथ भी संवाद आवश्यक है। किसी संस्था या व्यक्ति का मूल्यांकन केवल अतीत के आधार पर नहीं होना चाहिए। विचारों और कार्यशैली में समय के साथ परिवर्तन संभव है। श्री भागवत जी ने विभिन्न अवसरों पर सामाजिक समरसता और संवाद की आवश्यकता पर बात की है। CEO श्री मुहम्मद यूनुस ने कहा, “यदि भारत के मुसलमानों के बारे में मेयर ममदानी जी के मन में गंभीर चिंताएँ हैं, तो उन्हें श्री मोहन भागवत जी के सामने सीधे रखना अधिक प्रभावी होगा। कठिन प्रश्न पूछिए, अपनी असहमति रखिए और उनके विचार भी सुनिए—यही लोकतांत्रिक संवाद है।” श्री यूनुस ने कहा कि विदेशों तक पहुँचने वाली भारत की सूचनाएँ अलग-अलग स्रोतों से आती हैं और उनमें हमेशा पूरी तस्वीर सामने नहीं आती। “भारत में मुसलमानों के सामने चुनौतियाँ हैं और हम उनके सामाजिक-आर्थिक विकास एवं अधिकारों के लिए आवाज उठाते हैं। लेकिन वास्तविक भारत को समझने के लिए आम मुसलमानों, पसमांदा समाज और विभिन्न विचार रखने वाले लोगों से संवाद भी जरूरी है।”

महाज़ ने कहा कि किसी कार्यक्रम का लोकतांत्रिक विरोध करने का अधिकार सभी को है, लेकिन विरोध को नफरत, अपमान या सामाजिक विभाजन का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। असहमति शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से व्यक्त की जानी चाहिए। महाज़ ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य किसी धर्म या समुदाय के विरुद्ध खड़ा होना नहीं, बल्कि पसमांदा मुसलमानों के लिए शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सम्मान, आर्थिक विकास और समान अवसर सुनिश्चित करना तथा सामाजिक सद्भाव को मजबूत करना है। “हम नफरत की राजनीति नहीं, संवाद की राजनीति चाहते हैं। हम टकराव नहीं, बातचीत चाहते हैं। हम किसी समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि सभी नागरिकों के समान अधिकार और सम्मान के पक्ष में हैं।”

मेयर ज़ोहरान ममदानी से अपील- श्री परवेज़ हनीफ़ और श्री मुहम्मद यूनुस ने संयुक्त रूप से कहा, “श्री ममदानी जी, श्री मोहन भागवत जी आपके शहर में आए हैं। उनसे मिलिए, भारत के मुसलमानों के बारे में अपने सवाल उनके सामने रखिए, उनकी बात सुनिए और अपनी बात रखिए। संभव है कि इस संवाद से गलतफहमियाँ दूर हों और भारत तथा भारतीय समाज को समझने का एक नया रास्ता खुले।” महाज़ का विश्वास है कि भारत की विविधता, लोकतंत्र, सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने का रास्ता आपसी सम्मान और निरंतर संवाद से होकर जाता है।