लखनऊ : दारुल उलूम नदवतुल उलमा, लखनऊ के पूर्व प्राचार्य एवं वरिष्ठ आलिम-ए-दीन हज़रत मौलाना सईदुर्रहमान आज़मी अंसारी के इंतकाल की खबर से देश-विदेश के इल्मी और दीनी हलकों में शोक की लहर दौड़ गई। उनके इंतकाल पर ऑल इंडिया पसमांदा उलमा बोर्ड के
पदाधिकारियों ने गहरे दुख और संवेदना का इज़हार किया है। मौलाना सईदुर्रहमान आज़मी अंसारी ने अपनी पूरी ज़िंदगी तालीम, तदरीस, तर्बियत और दीनी खिदमत में गुज़ार दी। मुल्क के अहम दीनी इदारे दारुल उलूम नदवतुल उलमा से लंबे समय तक जुड़े रहे और बतौर प्राचार्य उन्होंने नई नस्ल की इल्मी और दीनी तर्बियत में अहम भूमिका निभाई। उनके शागिर्द आज हिंदुस्तान के अलावा दुनिया के विभिन्न हिस्सों में दीन-ए-इस्लाम की खिदमत में लगे हुए हैं। ऑल इंडिया पसमांदा उलमा बोर्ड के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष मुफ्ती सुहैल अहमद अंसारी क़ासमी ने मौलाना सईदुर्रहमान आज़मी अंसारी के इंतकाल पर गहरे दुख का इज़हार करते हुए कहा कि उनका इंतकाल इल्मी और दीनी दुनिया के लिए बड़ा नुकसान है। उन्होंने कहा कि मौलाना ने अपनी पूरी ज़िंदगी तालीम और दीन की खिदमत के लिए वक्फ कर दी। उनकी इल्मी और दीनी सेवाएं लंबे समय तक याद रखी जाएंगी। बोर्ड के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी मो. सद्दाम हुसैन ने कहा कि मौलाना सईदुर्रहमान आज़मी अंसारी की पूरी ज़िंदगी इल्म और दीन की खिदमत से जुड़ी रही। उनके इंतकाल से इल्मी दुनिया ने एक क़ीमती शख्सियत खो दी है। उनके शागिर्दों के जरिए उनकी इल्मी विरासत आगे भी जारी रहेगी। बोर्ड के राष्ट्रीय संगठन मंत्री मौलाना रकीब अंसारी ने कहा कि मौलाना सईदुर्रहमान आज़मी अंसारी की सेवाएं दारुल उलूम नदवतुल उलमा तक सीमित नहीं थीं, बल्कि उनके शागिर्दों के जरिए उनका इल्मी और दीनी असर देश-दुनिया तक पहुंचा। उनकी तालीमी और तर्बियती खिदमात को हमेशा याद रखा जाएगा।उलमा बोर्ड के पदाधिकारियों ने मरहूम के परिजनों, शागिर्दों और तमाम मुताल्लिकीन से इज़हार-ए-ताज़ियत करते हुए अल्लाह तआला से उनकी मग़फिरत, दरजात की बुलंदी और जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुकाम के लिए दुआ की। साथ ही परिजनों को सब्र-ए-जमील अता करने की दुआ की।

