अफवाहों से बचें, भाईचारा बनाए रखें : एआइपीएमएम
ईद पर शांति और सद्भाव की अपील
सामाजिक न्याय के मुद्दों पर ध्यान देने की मांग
पसमांदा महाज़ ने सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही
मध्य प्रदेश के धार स्थित विवादित परिसर भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद को लेकर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ द्वारा 15 मई 2026 को दिए गए फैसले के बाद ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़ ने पसमांदा मुस्लिम समाज (एआइपीएमएम) से शांति, संयम और कानूनी प्रक्रिया पर भरोसा बनाए रखने की अपील की है।
महाज़ ने अपने बयान में कहा कि यदि किसी पक्ष को न्यायालय के निर्णय पर आपत्ति है तो उसे संवैधानिक और कानूनी तरीके से सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जानी चाहिए। संगठन का मानना है कि किसी भी प्रकार का तनावपूर्ण माहौल या उग्र प्रतिक्रिया समाज और देश दोनों के हित में नहीं है।
संगठन ने कुछ अशरफ संगठनों, उलेमा और राजनीतिक व्यक्तियों द्वारा इस मुद्दे पर की जा रही अनावश्यक बयानबाजी से दूरी बनाए रखने की सलाह देते हुए कहा कि संवेदनशील मामलों को राजनीतिक रंग देने से सामाजिक सद्भाव प्रभावित होता है।
ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मुहम्मद युनुस ने कहा कि पसमांदा मुस्लिम समाज को इस विषय पर किसी प्रकार का भय या तनाव लेने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने अपील की कि मस्जिद-मंदिर जैसे संवेदनशील मुद्दों पर धैर्य, समझदारी और जिम्मेदारी का परिचय दिया जाए।
उन्होंने कहा कि संगठन खुली, निष्पक्ष और संवैधानिक बहस का समर्थन करता है ताकि सभी पक्षों की सहमति से देशहित में स्थायी समाधान निकाला जा सके।
मुहम्मद युनुस ने यह भी सुझाव दिया कि देश में मौजूद विवादित मंदिर-मस्जिद एवं मजारों से जुड़े प्रमुख स्थलों की एक स्पष्ट सूची जारी की जानी चाहिए और दोनों पक्षों के जिम्मेदार प्रतिनिधियों को आपसी संवाद के माध्यम से राष्ट्रीय हित में समाधान निकालना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश को लगातार धार्मिक विवादों में उलझाए रखना उचित नहीं है।
महाज़ के राष्ट्रीय अध्यक्ष परवेज़ हनीफ ने कहा कि 24 अगस्त 1935 के धार रियासत के राजपत्र में पूरे परिसर को “कमाल मौला मस्जिद” घोषित किया गया था और मुस्लिम समुदाय को वहां नमाज अदा करने की अनुमति दी गई थी। उन्होंने कहा कि यह निर्णय पवार राजवंश के शासनकाल में लिया गया था। मुस्लिम पक्ष का यह भी तर्क है कि भारतीय इस्लामी स्थापत्य में कमल, कलश जैसे स्थानीय प्रतीकों का प्रयोग सामान्य परंपरा का हिस्सा रहा है तथा सूफी और मुगल परंपरा में साझा सांस्कृतिक तत्वों को अपनाया जाता रहा है।
महाज़ ने कहा कि देश की जनता आज शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, महंगाई और सामाजिक न्याय जैसे वास्तविक मुद्दों पर गंभीर चर्चा चाहती है, इसलिए समाज को आपसी सद्भाव और विकास के मुद्दों पर आगे बढ़ना चाहिए।
ईद-उल-अज़हा के अवसर पर संगठन ने विशेष अपील करते हुए कहा कि पसमांदा मुस्लिम समाज पूरी शांति, संयम और जिम्मेदारी के साथ त्योहार मनाए तथा देश में भाईचारे, संविधान और कानून के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत करे। संगठन ने सभी नागरिकों से अफवाहों से बचने और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील भी की।

