ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़ देश के सभी मुसलमानों से अपील करता है कि वे ईद और अलविदा की नमाज़ पूरी श्रद्धा, अनुशासन और शांति के साथ मस्जिदों में अदा करें। इस दौरान यदि भीड़ अधिक हो और मस्जिद में एक बार में सभी नमाज़ी समा न सकें, तो मस्जिद प्रशासन दो या अधिक जमातों की व्यवस्था करे, ताकि किसी को असुविधा न हो और आम जनजीवन बाधित न हो।
सुन्नत के अनुसार अमल करने की अपील- हम मुसलमान नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की सुन्नत पर चलने वाले हैं। हमें सुलह-ए-हुदैबिया, मीसाक-ए-मदीना, “लाकुम दीनुकुम वलियद्दीन” (तुम्हारा दीन तुम्हारे लिए और हमारा दीन हमारे लिए), और आखिरी खुतबा (विदाई हज का भाषण) की शिक्षाओं को अपनाते हुए सामाजिक सौहार्द, अनुशासन और संयम का परिचय देना चाहिए।
धार्मिक आयोजनों के प्रति समभाव और सहिष्णुता- ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़ का मानना है कि कांवड़ यात्रा, कुंभ, ईद, अलविदा जुमा या अन्य धर्मों के त्योहार केवल एक धर्म विशेष के नहीं होते, बल्कि वे देश के साझा त्योहार हैं। इन आयोजनों के कारण यदि यातायात या अन्य व्यवस्थाओं में कुछ कठिनाइयाँ उत्पन्न होती हैं, तो इसका समाधान आपसी सहमति, प्रशासनिक सहयोग और सामुदायिक समझ के आधार पर किया जाना चाहिए।
संगठन यह भी स्पष्ट करता है कि किसी भी धर्म या समुदाय के पर्व-त्योहार सामाजिक समरसता और सौहार्द का माध्यम होने चाहिए, न कि टकराव और अव्यवस्था का कारण। इसलिए, किसी भी आयोजन से सार्वजनिक जीवन, यातायात या प्रशासनिक व्यवस्था में अनावश्यक बाधा उत्पन्न नहीं होनी चाहिए।
सार्वजनिक स्थलों और यातायात बाधा से बचाव- संगठन सभी मुसलमान भाइयों से अपील करता है कि वे किसी भी हाल में सड़कों, सार्वजनिक मार्गों या अन्य स्थानों को बाधित न करें। इस्लाम का वास्तविक संदेश “शांति, संयम और अनुशासन” है, और यह हमारा नैतिक दायित्व है कि हम इसे अपने आचरण में भी अपनाएँ।
गैर-ज़रूरी सरकारी बयानबाजी की निंदा- हाल ही में कुछ स्थानों पर पुलिस और प्रशासन द्वारा गैर-ज़रूरी बयानबाजी देखी गई, जिसमें मुसलमानों को डराने और धमकाने का प्रयास किया गया। ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़ इसकी कड़ी निंदा करता है और प्रशासन से आग्रह करता है कि वह जनता के बीच सौहार्द और विश्वास बनाए रखने का प्रयास करे, न कि किसी एक समुदाय को निशाना बनाकर अनावश्यक भय का माहौल पैदा करे।
समाज में अमन और एकता का संदेश- ईद और अलविदा की नमाज़ केवल इबादत का अवसर ही नहीं, बल्कि एक सामाजिक ज़िम्मेदारी भी है। हमें इस मौके को आपसी भाईचारे, सहिष्णुता और शांति के लिए इस्तेमाल करना चाहिए। संगठन की सभी शाखाओं और पदाधिकारियों से अनुरोध है कि वे अपने-अपने इलाकों में अमन और सौहार्द को बढ़ावा देने में सक्रिय भूमिका निभाएं।
ईद और अलविदा की नमाज़ के दौरान मस्जिदों में इबादत, सामाजिक अनुशासन, और सरकारी मशीनरी द्वारा किसी भी भेदभावपूर्ण रवैये के खिलाफ सजगता बनाए रखना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़ सभी मुसलमानों से अपील करता है कि वे अपने अमल और व्यवहार से इस्लाम की वास्तविक शिक्षाओं को समाज के सामने रखें और किसी भी उकसावे या तनाव में न आएं।
अल्लाह हमें अमन, भाईचारे और इंसाफ की राह पर चलने की तौफीक़ अता करे।”
ईद और अलविदा की नमाज़: मस्जिदों में अदायगी और सामाजिक ज़िम्मेदारी
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