सुरक्षा नियमों को सांप्रदायिक रंग देना गलत : एआइपीएमएम

अफवाहों से बचें, शांति बनाए रखें :
चेहरा ढककर प्रवेश रोकना सामान्य सुरक्षा उपाय : एआइपीएमएम
सुरक्षा के साथ गरिमा जरूरी : ज्वेलरी दुकानों को पसमांदा महाज़ का सुझाव
बुर्का-हिजाब से जोड़ना भ्रामक, मामला सुरक्षा का : एआइपीएमएम

पटना। बिहार प्रदेश में कुछ ज्वेलरी दुकानदारों एवं उनकी एसोसिएशनों द्वारा सुरक्षा कारणों से चेहरा ढके हुए व्यक्तियों—जैसे हेलमेट, मास्क, घूंघट, बुर्का आदि—को दुकान में प्रवेश या खरीदारी से रोकने से संबंधित सूचनाएं सामने आई हैं। ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़ (एआइपीएमएम) ने इसे बढ़ती लूटपाट और चोरी की घटनाओं के मद्देनज़र एक सामान्य और व्यावहारिक सुरक्षा उपाय बताया है।

संगठन ने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था किसी विशेष समुदाय या धार्मिक पहचान के विरुद्ध नहीं है, बल्कि सभी चेहरा ढके हुए व्यक्तियों पर समान रूप से लागू की जा रही है। एआइपीएमएम ने खेद व्यक्त किया कि कुछ शरारती तत्व इस सामान्य सुरक्षा व्यवस्था को सांप्रदायिक रंग देने का प्रयास कर रहे हैं और इसे केवल बुर्का या हिजाब से जोड़कर भ्रामक अफवाहें फैला रहे हैं, जिससे सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुँच सकता है।

ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़ (एआइपीएमएम) ने ऐसे अफवाह फैलाने वाले तत्वों की कड़ी निंदा करते हुए मुस्लिम समाज, विशेषकर पसमांदा मुस्लिम समाज से संयम बनाए रखने की अपील की है। संगठन ने कहा कि किसी भी प्रकार के बहकावे, झूठे प्रचार या उकसावे में न आएं और कानून-व्यवस्था तथा सामाजिक शांति को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।

साथ ही, महाज़ ने ज्वेलरी दुकानों के मालिकों एवं संबंधित एसोसिएशनों से यह भी आग्रह किया कि वे सुरक्षा के साथ-साथ महिलाओं की गरिमा और सम्मान का पूरा ध्यान रखें। संगठन ने सुझाव दिया कि चेहरा ढके होने की स्थिति में महिलाओं के लिए अलग काउंटर की व्यवस्था की जाए, महिला स्टाफ द्वारा पहचान प्रक्रिया पूरी कराई जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षित और सम्मानजनक तरीके से जांच की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

महाज़ का मानना है कि इस प्रकार के संतुलित और संवेदनशील कदमों से न केवल सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है, बल्कि किसी भी वर्ग की भावनाओं को आहत किए बिना सामाजिक सौहार्द और आपसी विश्वास को भी बनाए रखा जा सकता है।