सिडनी के बॉन्डी बीच में आतंकी हमले की ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़ ने कड़ी निंदा की

ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़, सिडनी के बॉन्डी बीच में हुई हिंसक आतंकी घटना की कड़े शब्दों में निंदा करता है। ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़ सिडनी के बॉन्डी बीच में 14 दिसंबर 2025 को हुए इस अमानवीय और कायरतापूर्ण हमले की घोर निंदा करता है। यह हमला हनुका उत्सव के दौरान यहूदी समुदाय पर किया गया था, जिसमें कम से कम 12 लोग मारे गए और दर्जनों घायल हुए। किसी भी निर्दोष व्यक्ति की जान लेना या जानमाल को नुकसान पहुँचाना न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि इंसानियत और सभी धर्मों की मूल शिक्षाओं के भी विरुद्ध है।

हमारा संगठन स्पष्ट रूप से यह कहना चाहता है कि कोई भी धर्म हिंसा, आतंक या नफ़रत की शिक्षा नहीं देता। सभी धर्म मानवता, शांति, करुणा और सह-अस्तित्व का संदेश देते हैं। “जियो और जीने दो” का सिद्धांत ही एक सभ्य और सुरक्षित समाज की बुनियाद है। हम सभी लोगों से अपील करते हैं कि वे इसी सिद्धांत पर चलते हुए एक-दूसरे की जान, माल, आस्था और सम्मान की रक्षा करें।

हर समुदाय को अपने धार्मिक कर्तव्यों का पालन करने, अपनी आस्था के अनुसार जीवन जीने और अपनी सांस्कृतिक पहचान को बढ़ावा देने का पूरा अधिकार है। किसी भी समुदाय या धार्मिक समूह को निशाना बनाना न केवल समाज में ज़हर घोलता है, बल्कि शांति और भाईचारे को भी गंभीर नुकसान पहुँचाता है।

इस दुखद घटना के बीच मानवता की एक मिसाल भी सामने आई है। सिडनी के बॉन्डी बीच में 43 वर्षीय अहमद अल अहमद द्वारा हमलावरों से बंदूक छीनकर लोगों की जान बचाना असाधारण साहस, सूझबूझ और इंसानियत का परिचायक है। उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर अनेक निर्दोष लोगों की रक्षा की, हालांकि वे खुद चार से पाँच गोलियों से घायल हो गए। यह कार्य साबित करता है कि मुश्किल घड़ी में भी इंसानियत ज़िंदा है।

ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़ इस बहादुर व्यक्ति को सलाम करता है, उनके साहसिक कदम की भूरी-भूरी प्रशंसा करता है और उनके प्रति आभार व्यक्त करता है।

हम संबंधित प्रशासन और सरकार से मांग करते हैं कि दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। साथ ही, पीड़ितों और उनके परिवारों को हर संभव सहायता प्रदान की जाए।

अंत में, हमारा संगठन सभी समुदायों, धर्मों और देशों के लोगों से अपील करता है कि नफ़रत, अफ़वाहों और उकसावे से दूर रहें, शांति, संवाद और आपसी सम्मान को बढ़ावा दें, क्योंकि हिंसा का कोई धर्म नहीं होता और इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है।