वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024: अफवाहों का खंडन और सच्चाई की अपील

नई दिल्ली। ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़, एक राष्ट्रवादी संगठन, जो पसमांदा मुस्लिम समाज को जागरूक करने और उन्हें मुख्यधारा में शामिल करने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है, वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 को लेकर समाज में फैल रही अफवाहों और भ्रांतियों का कड़ा खंडन करता है। यह विधेयक, जो वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता, जवाबदेही और समावेशिता लाने के उद्देश्य से प्रस्तावित किया गया है, कुछ स्वार्थी तत्वों द्वारा गलत ढंग से प्रस्तुत किया जा रहा है। हमारा संगठन पसमांदा मुस्लिम समाज से अपील करता है कि वे इन भ्रामक प्रचारों से सावधान रहें और तथ्यों के आधार पर अपनी राय बनाएं।

पदाधिकारियों के बयान
1. “कुछ अशरफिया संगठन और व्यक्ति अपने निहित स्वार्थों के लिए समाज को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। यह विधेयक वक्फ संपत्तियों को जब्त करने की साजिश नहीं, बल्कि दुरुपयोग रोकने और गरीब मुस्लिमों, खासकर पसमांदा समाज को लाभ पहुंचाने का प्रयास है। हम समाज से एकजुट रहने और अफवाहों से बचने की अपील करते हैं।”

मुहम्मद युनुस, चीफ एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर

2. इस विधेयक में महिलाओं के प्रतिनिधित्व और उनके उत्तराधिकार अधिकारों को सुनिश्चित करना एक स्वागत योग्य कदम है। यह अफवाह कि यह मुस्लिम विरोधी है, पूरी तरह गलत है। हम महिलाओं से अपील करते हैं कि वे तथ्यों को समझें और जागरूकता फैलाएं।”

परवेज़ हनीफ, राष्ट्रीय अध्यक्ष

“जेपीसी के संशोधन पसमांदा समाज की आवाज को मजबूत करने वाले हैं। यह दावा कि सरकार वक्फ संपत्तियों पर कब्जा करेगी, निराधार है। हमारा संगठन वक्फ संपत्तियों की रक्षा और उनके सही उपयोग के लिए प्रतिबद्ध है।”

शरिक अदीब अंसारी राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष

विधेयक की वर्तमान स्थिति- वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 को केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने 8 अगस्त 2024 को लोकसभा में पेश किया था। इसके बाद इसे संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेजा गया, जिसने 30 जनवरी 2025 को अपनी 655 पृष्ठों की रिपोर्ट लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सौंपी। रिपोर्ट में 14 प्रमुख संशोधन सुझाए गए, जिन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 19 फरवरी 2025 को मंजूरी दी। अब यह विधेयक 3 अप्रैल 2025 को लोकसभा में पेश होने वाला है।

 जेपीसी द्वारा सुझाए गए 14 प्रमुख संशोधन

1. नाम परिवर्तन: “एकीकृत वक्फ प्रबंधन, सशक्तीकरण, दक्षता और विकास विधेयक, 1995″।
2. गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति: राज्य वक्फ बोर्ड और केंद्रीय वक्फ परिषद में दो गैर-मुस्लिम सदस्य।
3. महिला प्रतिनिधित्व: वक्फ बोर्ड में दो मुस्लिम महिलाएं।
4. पिछड़े मुस्लिमों का प्रतिनिधित्व: मुस्लिम ओबीसी से एक सदस्य।
5. संपत्ति का केंद्रीय पंजीकरण: छह महीने में केंद्रीय पोर्टल पर विवरण।
6. सीईओ के लिए धर्म की शर्त हटाना: मुस्लिम होने की अनिवार्यता समाप्त।
7. जिला मजिस्ट्रेट की भूमिका: जांच और निगरानी में भागीदारी।
8. ऑडिट में पारदर्शिता: बेहतर ऑडिट प्रणाली।
9. अवैध कब्जों पर रोक: सत्यापन प्रक्रिया अनिवार्य।
10. वक्फ बनाने की शर्त: पांच वर्ष तक इस्लाम का पालन।
11. सरकारी संपत्ति पर दावा सीमित करना: अनुचित दावों पर रोक।
12. महिलाओं के उत्तराधिकार अधिकार: अधिकारों की रक्षा।
13. ट्रिब्यूनल संरचना में बदलाव: प्रशासनिक विशेषज्ञों को शामिल करना।
14. संपत्ति सत्यापन: दावों के लिए सत्यापन अनिवार्य।

अफवाहों का खंडन और सच्चाई
1. अफवाह: सरकार मस्जिदों, कब्रिस्तानों और मदरसों को नियंत्रित करेगी।
सच्चाई: ऐसा कोई प्रावधान नहीं, उद्देश्य प्रबंधन सुधार है।
2. अफवाह: वक्फ बोर्ड कमजोर होगा।
सच्चाई: पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने का प्रयास।
3. अफवाह: बिना दस्तावेज वाली संपत्तियां जब्त होंगी।
सच्चाई: जांच व्यवस्थित होगी, जब्ती का प्रावधान नहीं।
4. अफवाह: यह मुस्लिम विरोधी है।
सच्चाई: गरीब मुस्लिमों और पसमांदा समाज के हित में।

समाधान और सुझाव
1. सत्यापन करें: सरकारी दस्तावेज और विशेषज्ञों की राय पर भरोसा करें।
2. संसदीय चर्चा का इंतजार करें: 3 अप्रैल 2025 के परिणाम देखें।
3. कानूनी प्रक्रिया अपनाएं: संवैधानिक रास्ते का उपयोग करें।
4. संगठित और सतर्क रहें: विभाजनकारी ताकतों से बचें।

हमारा दृष्टिकोण-  हमारा संगठन मानता है कि कुछ लोग जानबूझकर भ्रामक जानकारी फैला रहे हैं। यह दावा कि सरकार वक्फ संपत्तियों को जब्त करेगी, भारत के संविधान के खिलाफ है। विरोध करने वाले वे हो सकते हैं, जो दुरुपयोग से लाभ उठाते आए हैं। हम वक्फ संपत्तियों की रक्षा और उनके न्यायसंगत उपयोग के लिए प्रतिबद्ध हैं। यदि यह विधेयक पारदर्शिता लाता है, तो यह सकारात्मक कदम है।हम पसमांदा मुस्लिम समाज से अपील करते हैं कि वे अफवाहों से बचें, तथ्यों पर ध्यान दें और एकजुट रहें। जागरूकता हमारी ताकत है।