मिहीनपुरवा (बहराइच), मौलाना अली हुसैन आसिम बिहारी की जन्मदिन (यौम-ए-पैदाइश) के अवसर पर खिराज-ए-अकीदत एवं शिक्षा प्रेरणा कार्यक्रम का आयोजन आज शाम 7 बजे ए.पी.जे. अब्दुल कलाम पब्लिक स्कूल (मिहीनपुरवा यूनिट) में किया गया। यह कार्यक्रम ऑल इंडिया
पसमांदा मुस्लिम महाज़ के तत्वावधान में आयोजित हुआ।
कार्यक्रम में शिक्षा के महत्व, पसमांदा समाज के सर्वांगीण विकास तथा आधुनिक शिक्षा और धार्मिक शिक्षा के सुंदर समन्वय पर विस्तृत चर्चा की गई। मुख्य उद्देश्य समाज के बच्चों को दीन व दुनिया की संतुलित शिक्षा प्रदान कर उन्हें सशक्त, आत्मनिर्भर और मुख्यधारा से जोड़ना था।
वक्ताओं ने कहा कि यह स्कूल दीन और दुनिया के अनुपम संगम का एक जीवंत उदाहरण है, जहाँ कुरान, हदीस, अकीदा और दीनियात की शिक्षा के साथ-साथ गणित, विज्ञान, अंग्रेजी, कंप्यूटर तथा अन्य आधुनिक विषयों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जा रही है।
वक्ताओं ने याद दिलाया कि इस्लाम की शिक्षा की शुरुआत ही “इकरा” (पढ़ो) से हुई है। कुरान की पहली आयत “इकरा बिस्मि रब्बिकल्लजी खलक” (अपने रब के नाम से पढ़ो, जिसने पैदा किया) पूरी मानव जाति को ज्ञान और शिक्षा की ओर आमंत्रित करती है।
साथ ही कुरान की आयत “लकुम दीनुकुम वलिय दीन” (तुम्हारे लिए तुम्हारा धर्म और मेरे लिए मेरा धर्म) धार्मिक स्वतंत्रता और सर्वधर्म समभाव का स्पष्ट संदेश देती है।
इसके अलावा, पैगंबर मुहम्मद ﷺ के आखिरी खुतबे में इंसानी मासावात (मानव समानता), महिलाओं की इज्जत और उनके अधिकारों पर विशेष जोर दिया गया था। उन्होंने फरमाया था कि “सभी इंसान आदम और हव्वा की संतान हैं। अरब का गैर-अरब पर, सफेद का काले पर और काले का सफेद पर कोई श्रेष्ठता नहीं, सिवाय तकवा और अच्छे अमल के।” महिलाओं के साथ अच्छा व्यवहार करने और उनके अधिकारों की रक्षा करने की हिदायत भी दी गई।
इसी प्रकार मीसाक-ए-मदीना ने मुसलमानों और अन्य समुदायों (यहूदियों सहित) के बीच शांति, सह-अस्तित्व और सामाजिक न्याय की मजबूत नींव रखी। जबकि सुल्ह-ए-हुदैबिया ने समझौते और शांति के महत्व को रेखांकित किया, जो बाद में इस्लाम के प्रसार का एक बड़ा माध्यम बना।
इन उच्च इस्लामी शिक्षाओं के प्रकाश में वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि शिक्षा ही किसी भी समाज के उत्थान, समानता और सशक्तिकरण का सबसे मजबूत माध्यम है।
मुख्य अतिथि मुहम्मद युनुस (मुख्य कार्यकारी अधिकारी, ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़) ने अपने संबोधन में कहा, “पसमांदा समाज की तरक्की के लिए शिक्षा को प्राथमिकता देना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।” उन्होंने इस पहल को समाज के लिए मील का पत्थर बताते हुए इसे और आगे बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने याद दिलाया कि पसमांदा आंदोलन के जनक मौलाना आसिम बिहारी ने अपने पूरे जीवनकाल में शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी थी। उन्हीं के नक्शे-कदम पर चलते हुए संगठन ने गुजरहना, मोतीपुर (जिला बहराइच) में मदरसे को डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम पब्लिक स्कूल में परिवर्तित कर बच्चों को आधुनिक शिक्षा प्रदान करने की मुहिम शुरू की है।
मुहम्मद युनुस ने सभी से अपील की कि अन्य मदरसों में भी आधुनिक शिक्षा को शामिल किया जाए। उन्होंने बताया कि जिला पीलीभीत में भी इसी दिशा में प्रयास चल रहे हैं और अन्य क्षेत्रों में भी लोगों को इस प्रगतिशील पहल में सक्रिय रूप से भाग लेना चाहिए।
विशिष्ट अतिथियों में शामिल थे: – श्री राम सरोज पाठक (मंडल अध्यक्ष, भाजपा) – इमरान राईन (पूर्व एवं भावी प्रत्याशी, अध्यक्ष नगर पालिका मिहिनपुरवा) – अजय कुमार वर्मा (बाबू) (प्रधान, मोतीपुर ग्राम पंचायत) – सिराजुल हक (प्रधान, अग्नि गाँव)
– सफीक मलिक (प्रधान, मटेही) इन सभी अतिथियों ने कार्यक्रम की सराहना की और इस प्रगतिशील पहल में हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया।
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि यह स्कूल पसमांदा आंदोलन की दूरदर्शी सोच का हिस्सा है, जिसमें शिक्षा, समानता, सामाजिक न्याय, धार्मिक सहिष्णुता और आत्मनिर्भरता को विशेष महत्व दिया जा रहा है। हाल ही में लखनऊ में आयोजित ऑल इंडिया पसमांदा उलमा बोर्ड की बैठक में भी मदरसों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने पर जोर दिया गया था। सभी उपस्थित लोगों ने इस तरह की सकारात्मक और प्रगतिशील पहलों को सफल बनाने के लिए समाज के हर वर्ग से सक्रिय सहयोग एवं समर्थन की अपील की।

