संत कबीर हथकरघा पुरस्कार से पसमांदा समाज गौरवान्वित

संत कबीर हथकरघा पुरस्कार से सम्मानित शाह मुहम्मद अंसारी को पसमांदा महाज़ की बधाई

ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़ ने मा. राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु जी द्वारा नई दिल्ली में आयोजित 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर श्री शाह मुहम्मद अंसारी जी को ‘संत कबीर हथकरघा पुरस्कार’ (लुप्तप्राय बुनाई श्रेणी) से सम्मानित किए जाने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी हैं।
महाज़ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मुहम्मद युनुस ने कहा कि यह सम्मान केवल श्री शाह मुहम्मद अंसारी जी की व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि देश के मेहनतकश पसमांदा मुस्लिम बुनकरों, दस्तकारों, शिल्पकारों एवं कारीगरों की सदियों पुरानी हुनरमंदी, मेहनत और समृद्ध विरासत का राष्ट्रीय सम्मान है।
उन्होंने कहा कि श्री शाह मुहम्मद अंसारी जी ने गौरवशाली बनारसी बुनाई कला के संरक्षण, संवर्धन तथा पारंपरिक स्वरूप को जीवित रखने के साथ-साथ नई पीढ़ी के बुनकरों को प्रशिक्षित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनके प्रयासों ने उत्तर प्रदेश की समृद्ध हथकरघा परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने के साथ यह संदेश भी दिया है कि पारंपरिक कला, हुनर और हस्तशिल्प आज भी भारत की सांस्कृतिक एवं आर्थिक शक्ति का महत्वपूर्ण आधार हैं।
राष्ट्रीय अध्यक्ष परवेज़ हनीफ ने कहा कि ‘संत कबीर हथकरघा पुरस्कार’ का महत्व इसलिए भी विशेष है, क्योंकि संत कबीर भारतीय समाज की साझा सांस्कृतिक, मानवीय और श्रम की विरासत के महान प्रतीक हैं। संत कबीर ने मेहनत, समानता, मानवता और सामाजिक समरसता का संदेश दिया। उनका जीवन यह प्रेरणा देता है कि मनुष्य की पहचान उसके कर्म, हुनर और इंसानियत से होती है।
उन्होंने कहा कि संत कबीर के नाम पर दिया जाने वाला यह राष्ट्रीय सम्मान पसमांदा समाज के लिए विशेष गौरव का विषय है। यह उन लाखों पसमांदा परिवारों के हुनर और श्रम को सम्मान देता है, जिनकी पीढ़ियाँ बुनाई, दस्तकारी, कारीगरी और विभिन्न पारंपरिक व्यवसायों के माध्यम से देश की अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध करती रही हैं।
ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़ ने कहा कि पसमांदा समाज के अनेक मेहनतकश परिवारों ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने पारंपरिक हुनर को जीवित रखा और उसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने का कार्य किया है। श्री शाह मुहम्मद अंसारी जी की यह उपलब्धि समाज के युवाओं के लिए प्रेरणादायक है। इससे यह संदेश मिलता है कि पारंपरिक हुनर को आधुनिक शिक्षा, प्रशिक्षण, तकनीक और बाजार से जोड़कर सम्मानजनक रोजगार, आत्मनिर्भरता और आर्थिक सशक्तीकरण का मार्ग प्रशस्त किया जा सकता है।
महाज़ का मानना है कि श्री शाह मुहम्मद अंसारी जी की सेवा, साधना और अनुभव से पसमांदा समाज की नई पीढ़ी प्रेरणा लेगी, अपने पारंपरिक हुनर पर गर्व करेगी तथा उसे आधुनिक समय की आवश्यकताओं के अनुरूप आगे बढ़ाने का संकल्प करेगी। उनका यह सम्मान देशभर के युवा बुनकरों और कारीगरों को अपने हुनर को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए प्रेरित करेगा।
शीर्ष नेतृत्व ने कहा कि यह उपलब्धि ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़ के लिए भी गर्व का विषय है। महाज़ इसे पसमांदा समाज की प्रतिभा, परिश्रम और क्षमता की राष्ट्रीय पहचान के रूप में देखता है। संगठन भविष्य में भी पसमांदा समाज के मेहनतकश, हुनरमंद और प्रतिभाशाली लोगों को प्रोत्साहित करने तथा उन्हें सम्मान, अवसर और उचित मंच उपलब्ध कराने के लिए प्रयासरत रहेगा।
ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़ की ओर से श्री शाह मुहम्मद अंसारी जी को इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान के लिए पुनः हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ। महाज़ उनके उज्ज्वल भविष्य तथा बनारसी बुनाई और हथकरघा कला के संरक्षण एवं विकास के लिए उनके निरंतर प्रयासों की सफलता की कामना करता है।
यह उपलब्धि पसमांदा समाज के लिए गर्व, नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा और भारत की समृद्ध साझा विरासत के लिए सम्मान का प्रतीक है।
पसमांदा समाज के मेहनतकश बुनकरों, दस्तकारों और कारीगरों को सलाम।
संत कबीर की मानवता, समानता और श्रम की विरासत को सलाम।
श्री शाह मुहम्मद अंसारी जी की उपलब्धि को सलाम।