पसमांदा समाज के मुद्दों पर राष्ट्रीय चिंतन कार्यशाला का ऐलान

  • ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़ की राष्ट्रीय ज़ूम मीटिंग सम्पन्न
  • “पसमांदा रोशनी परियोजना” शुरू करने का निर्णय
  • शिक्षा, रोजगार और सामाजिक न्याय पर महाज़ का जोर
  • 13 जून को लखनऊ प्रेस क्लब में होगी राष्ट्रीय कार्यशाला
  • सदस्यता अभियान तेज करने और संगठन विस्तार पर चर्चा
  • सोशल मीडिया पर गैर-जरूरी विवादों से दूर रहने की अपील
  • पसमांदा समाज को मुख्यधारा से जोड़ने पर बल
  • राष्ट्रीय और प्रदेश पदाधिकारियों के लिए मासिक चंदा अनिवार्य
  • पसमांदा समाज की वैचारिक मजबूती की दिशा में बड़ा कदम

 

लखनऊ। ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़ की मेंडेटरी मासिक ज़ूम मीटिंग 9 मई 2026 को राष्ट्रीय कार्यालय लखनऊ एवं पंजीकृत कार्यालय अलीगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में सफलतापूर्वक आयोजित की गई। रात्रि 9:30 बजे से 11:30 बजे तक चली इस महत्वपूर्ण बैठक में देशभर से 58 केंद्रीय एवं राज्य पदाधिकारी तथा पसमांदा मुस्लिम एक्टिविस्ट शामिल हुए। बैठक का संचालन संगठन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मोहम्मद यूनुस ने किया, जबकि अध्यक्षता राष्ट्रीय अध्यक्ष परवेज़ हनीफ़ ने की। राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष शारिक अदीब अंसारी ने सभी मेहमानों और पदाधिकारियों का स्वागत किया।

बैठक में पसमांदा समाज से जुड़े सामाजिक न्याय, शिक्षा, राजनीतिक भागीदारी, रोजगार और संगठन विस्तार जैसे मुद्दों पर गंभीर चर्चा हुई। बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की उपस्थिति के कारण सभी साथियों को अपनी बात रखने का पर्याप्त समय नहीं मिल सका। संगठन की ओर से सभी साथियों से अपील की गई कि वे अपने सुझाव अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी के व्हाट्सएप नंबर पर भेजें, ताकि उन्हें आधिकारिक कार्यवाही में शामिल कर शासन-प्रशासन तक पहुँचाया जा सके।

बैठक में हालिया विधानसभा चुनावों के परिणामों पर विशेष चर्चा हुई। बंगाल, असम और केरल जैसे राज्यों में मुस्लिम ओबीसी, दलित और पिछड़े समाज की निर्णायक संख्या होने के बावजूद शिक्षा, रोजगार, सामाजिक न्याय और अधिकारिता जैसे मूल मुद्दों की उपेक्षा पर चिंता व्यक्त की गई। बिहार और झारखंड इकाइयों ने बंगाल एवं असम की परिस्थितियों पर गंभीर चिंता जताई। बैठक में कहा गया कि धार्मिक ध्रुवीकरण और सांप्रदायिक राजनीति के कारण पसमांदा समाज के वास्तविक सामाजिक-आर्थिक मुद्दे पीछे छूटते जा रहे हैं।

गहन विचार-विमर्श के बाद सर्वसम्मति से “पसमांदा समाज की सामाजिक समरसता, सामाजिक न्याय एवं सामुदायिक विकास” विषय पर राष्ट्रीय स्तर की चिंतन कार्यशाला आयोजित करने का निर्णय लिया गया। यह कार्यशाला 13 जून 2026 को लखनऊ प्रेस क्लब में आयोजित होगी। कार्यशाला में हालिया चुनावों की समीक्षा, पसमांदा समाज की राजनीतिक भागीदारी, शिक्षा, रोजगार, आरक्षण, पंचायत एवं नगर निकाय चुनावों में ओबीसी मुस्लिम नेतृत्व, सामाजिक समरसता और “इंडोनेशिया सर्वधर्म मॉडल” जैसे विषयों पर चर्चा की जाएगी।

बैठक में “पसमांदा रोशनी परियोजना” शुरू करने का भी प्रस्ताव पारित किया गया। इस परियोजना के तहत योग्य ओबीसी उलेमा, शिक्षित सामाजिक कार्यकर्ताओं और विशेषज्ञ प्रशिक्षकों को जोड़कर पसमांदा समाज को शिक्षा, सामाजिक अधिकारिता, सरकारी योजनाओं, सर्वधर्म समभाव और विकास आधारित सोच के प्रति जागरूक किया जाएगा। प्रथम चरण में उत्तर प्रदेश सहित 100 प्रभावी जिलों और 50 संसदीय क्षेत्रों में अभियान चलाने पर सहमति बनी। इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष परवेज़ हनीफ़ को अधिकृत किया गया।

बैठक में संगठन की वैचारिक स्पष्टता पर भी जोर दिया गया। संगठन ने स्पष्ट किया कि ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़ सामाजिक सुधार और सामाजिक न्याय का मंच है तथा इस्लाम से संबंधित आधिकारिक विषयों पर केवल ऑल इंडिया पसमांदा उलेमा बोर्ड ही अपनी बात रखेगा। सोशल मीडिया पर गैर-जरूरी विवादों और “Ex-Muslim” एवं “Ex-Hindu” जैसे मुद्दों में उलझने पर चिंता व्यक्त करते हुए सभी साथियों से ऐसे विवादों से दूरी बनाए रखने की अपील की गई।

संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य पसमांदा समाज को मुख्यधारा से जोड़ना, शिक्षा एवं रोजगार को बढ़ावा देना, सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना तथा सामाजिक समरसता को मजबूत करना है। साथ ही किसी भी बिरादरी — सैयद, शेख, पठान, मिर्ज़ा आदि — के विरुद्ध अपमानजनक टिप्पणी को अस्वीकार्य बताया गया।

बैठक में संगठन विस्तार और सदस्यता अभियान को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। ब्लॉक स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक संगठन को मजबूत करने पर बल दिया गया। झारखंड इकाई द्वारा बैंक खाता सफलतापूर्वक खोले जाने की जानकारी साझा की गई तथा बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली इकाइयों को भी शीघ्र बैंक खाते खोलने के निर्देश दिए गए। जून 2026 से राष्ट्रीय एवं प्रदेश स्तर के सभी पदाधिकारियों के लिए ₹500 मासिक चंदा अनिवार्य करने का निर्णय भी लिया गया।

बैठक में राष्ट्रीय, प्रदेश और जिला स्तर के कई प्रमुख पदाधिकारी एवं सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए, जिनमें मोहम्मद अहमद अंसारी, हाजी मोहम्मद नेहाल अंसारी, शमीम अंसारी, शाइस्ता अख्तर सलमानी, शकील सैफी, जफर आलम राइन, काशिम अंसारी, इब्राहिम अहमद, हाशिम पसमांदा, मोहम्मद इरफान मीर, नसीम अहमद जोगी, मोहम्मद इदरीस अंसारी, कुतुबुद्दीन अंसारी, अकरम कुरैशी, एड. आरिफ इकबाल अंसारी, जब्बार हुसैन, डॉ. फैयाज़ अहमद फ़ैज़ी, तौकीर अहमद, अब्बू शहीद अंसारी, अफज़ल अंसारी, इरफान अहमद वारसी, शम्सुल हक़ सहित अनेक साथी उपस्थित रहे।

संगठन के अनुसार यह बैठक पसमांदा समाज की वैचारिक स्पष्टता, संगठनात्मक मजबूती और सामाजिक न्याय के संघर्ष को नई दिशा देने वाला एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।