AIPMM ने मनाई अंबेडकर जयंती

बाबा साहब के विचारों को अपनाने का लिया संकल्प
सामाजिक न्याय के अग्रदूत को दी श्रद्धांजलि
अंबेडकर जयंती पर शिक्षा और समानता पर जोर
महाज कार्यालय में हुआ जयंती समारोह
बाबा साहब के आदर्शों पर चलने का आह्वान
अंबेडकर जयंती पर जुटे कार्यकर्ता और पदाधिकारी
समतामूलक समाज के निर्माण का लिया संकल्प

लखनऊ। आज आल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज (AIPMM) के राष्ट्रीय कार्यालय पर डाॅ. भीमराव अम्बेडकर की जयंती बड़ी धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर प्रदेश सलाहकार अकील अंसारी ने कहा कि आज आज हम सब यहां भारत के महान सपूत, संविधान निर्माता और सामाजिक न्याय के अग्रदूत डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी को याद करने के लिए एकत्रित हुए हैं। उनका जीवन संघर्ष, साहस और समर्पण का अद्भुत उदाहरण है।
डॉ. अम्बेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को एक साधारण परिवार में हुआ था। उन्होंने अपने जीवन में अनेक कठिनाइयों और भेदभाव का सामना किया, लेकिन कभी हार नहीं मानी। शिक्षा को उन्होंने अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया और दुनिया के श्रेष्ठ विश्वविद्यालयों से उच्च शिक्षा प्राप्त की। जब संविधान लिखा जा रहा था तब उन्होंने कहा था कि इस संविधान में मुसलमानों को भी हिन्दुओं की तहर आरक्षण मिलेगा मगर उस समय के अशराफ मुसलमानों ने इसका यह कहकर विरोध किया कि मुसलमानों में काई जाति भेदभाव नहीं है हम सब एक हैं, जिसकी वजह से आज पसमांदा मसुलमानों को आरक्षण नहीं मिला और हम आज दलित से बदतर जिन्दगी जीने को मजबूर हैं, हमें वह सुविधा नहीं मिली जो दलित, पिछड़ों को मिली।
डॉ. अम्बेडकर जी का मानना था कि शिक्षा वह शेरनी का दूध है, जो इसे पिएगा, वह दहाड़ेगा। उन्होंने हमेशा समाज के वंचित और कमजोर वर्गों के अधिकारों के लिए आवाज उठाई। उनके अथक प्रयासों के कारण ही हमें एक ऐसा संविधान मिला, जो सभी नागरिकों को समान अधिकार और न्याय प्रदान करता है।
जिला अध्यक्ष फैज मोहम्मद ने कहा डाॅ. अम्बेडकर केवल एक महान नेता ही नहीं, बल्कि एक महान विचारक, अर्थशास्त्री और समाज सुधारक भी थे। उन्होंने जातिवाद और सामाजिक असमानता के खिलाफ जीवनभर संघर्ष किया और एक समतामूलक समाज की स्थापना का सपना देखा। श्री फैज ने कहा आज हमें उनके आदर्शों को अपनाने का संकल्प लेना चाहिए। हमें शिक्षा को महत्व देना चाहिए, समानता और भाईचारे को बढ़ावा देना चाहिए और एक मजबूत एवं न्यायपूर्ण भारत के निर्माण में अपना योगदान देना चाहिए। उन्होंने कहा मैं यही कहना चाहूंगा कि डॉ. अम्बेडकर जी का जीवन हमें सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी अगर हमारे इरादे मजबूत हों, तो हम किसी भी लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं। इस अवसर पर डा. जैनुल आबदीन, बन्ने अली, अकील अंसारी, कार्यालय प्रभारी जफर आलम, एहतेशाम, शकील लेड़ी आदि लोग मौजूद रहे।