दिल्ली विधानसभा चुनाव के बाद एग्जिट पोल और पसमांदा समाज की उम्मीदें

दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 का मतदान संपन्न हो चुका है, और अब विभिन्न एग्जिट पोल के नतीजे सामने आ रहे हैं। कुछ एग्जिट पोल भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को बढ़त दिखा रहे हैं, जबकि कुछ आम आदमी पार्टी (AAP) की सत्ता में वापसी का संकेत दे रहे हैं। हालांकि, असली परिणाम मतगणना के दिन ही पता चलेंगे, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों और आम जनता के बीच इस बात को लेकर उत्सुकता बनी हुई है कि दिल्ली की बागडोर किसके हाथ में जाएगी।

पसमांदा मुस्लिम समाज और उसकी राजनीतिक स्थिति- ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़ (AIPMM) एक गैर-राजनीतिक सामाजिक संगठन है, जो पसमांदा मुसलमानों के हक, अधिकार और सामाजिक-आर्थिक उत्थान के लिए काम करता है। संगठन का हमेशा यह मानना रहा है कि लोकतंत्र में जनता का फैसला सर्वोपरि होता है, और जो भी सरकार बनेगी, उसे संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुसार सभी समुदायों के कल्याण के लिए कार्य करना चाहिए। पसमांदा मुस्लिम समाज ऐतिहासिक रूप से सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से उपेक्षित रहा है। दिल्ली जैसे महानगर में भी इस समुदाय के लोगों को बुनियादी सुविधाओं की कमी, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और रोजगार के अवसरों की समस्या से जूझना पड़ता है। इस चुनाव में पसमांदा समाज ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया है, और अब उनकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नई सरकार उनकी जरूरतों को कितना महत्व देती है।

बीजेपी की संभावित सरकार और पसमांदा समाज- अगर एग्जिट पोल सही साबित होते हैं और दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सरकार बनती है, तो यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वह पसमांदा मुस्लिम समाज के लिए क्या नीतियां अपनाती है। हाल के वर्षों में बीजेपी ने पसमांदा मुसलमानों को अपने पक्ष में लाने के प्रयास किए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य नेताओं ने कई बार पसमांदा मुस्लिम समाज की समस्याओं को दूर करने की बात कही है। हालांकि, पसमांदा समाज की वास्तविक चिंताओं को दूर करने के लिए केवल बयानबाजी नहीं, बल्कि ठोस नीतिगत निर्णयों की आवश्यकता है।

अगर बीजेपी सत्ता में आती है, तो ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़ निम्नलिखित मुद्दों पर सरकार से ठोस कार्रवाई की अपेक्षा करता है:

1. शिक्षा और रोजगार: पसमांदा बहुल क्षेत्रों में सरकारी स्कूलों और कॉलेजों की गुणवत्ता में सुधार किया जाए। पसमांदा मुस्लिम छात्रों के लिए विशेष छात्रवृत्ति योजनाएं लागू की जाएं। कौशल विकास (स्किल डेवलपमेंट) कार्यक्रमों में पसमांदा समाज के युवाओं को प्राथमिकता दी जाए, ताकि उन्हें अच्छी नौकरियां मिल सकें।

2. स्वास्थ्य सुविधाएं: पसमांदा बहुल इलाकों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या बढ़ाई जाए। सरकारी अस्पतालों में गरीब और जरूरतमंद पसमांदा मरीजों के लिए मुफ्त और सुलभ चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित की जाए।

3. आर्थिक सशक्तिकरण: छोटे और मध्यम उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए विशेष ऋण योजनाएं बनाई जाएं। स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए सरकारी योजनाओं में पसमांदा समाज को प्राथमिकता दी जाए।

4. राजनीतिक भागीदारी: बीजेपी को चाहिए कि वह अपने संगठन और सरकार में पसमांदा मुस्लिम समाज के नेताओं को उचित प्रतिनिधित्व दे। नीतिगत निर्णयों में पसमांदा समाज की भागीदारी सुनिश्चित की जाए।

आम आदमी पार्टी की संभावित सरकार और पसमांदा समाज

अगर आम आदमी पार्टी (AAP) फिर से सत्ता में आती है, तो भी यह देखना आवश्यक होगा कि वह पसमांदा मुस्लिम समाज के लिए क्या कदम उठाती है। AAP सरकार ने पिछले वर्षों में शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में कुछ उल्लेखनीय कार्य किए हैं, लेकिन पसमांदा समाज की वास्तविक भागीदारी और उत्थान के लिए और अधिक ठोस प्रयासों की आवश्यकता है।

अगर AAP दोबारा सत्ता में आती है, तो पसमांदा समाज को उनसे निम्नलिखित उम्मीदें होंगी:

1. राजनीतिक प्रतिनिधित्व: आम आदमी पार्टी को चाहिए कि वह अपने संगठन और चुनावी टिकट वितरण में पसमांदा समाज के नेताओं को उचित भागीदारी दे। सरकार बनने के बाद पसमांदा समाज से जुड़े लोगों को प्रशासनिक पदों और नीति-निर्माण प्रक्रियाओं में शामिल किया जाए।

2. शिक्षा और स्वास्थ्य: मोहल्ला क्लीनिक और सरकारी स्कूलों की बेहतरी को जारी रखा जाए और पसमांदा बहुल क्षेत्रों में इनका विस्तार किया जाए। पसमांदा मुस्लिम बच्चों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए विशेष योजनाएं लागू की जाएं।

3. सुरक्षा और अधिकार: पसमांदा मुस्लिम समाज को सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जाए, ताकि वे बिना किसी भेदभाव के अपने हक और अधिकारों का उपयोग कर सकें। पसमांदा बहुल इलाकों में कानून-व्यवस्था को मजबूत किया जाए, ताकि वहां के नागरिक सुरक्षित महसूस कर सकें।

ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़ की तटस्थ भूमिका

ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़ (AIPMM) किसी भी राजनीतिक दल का समर्थन नहीं करता, बल्कि केवल पसमांदा समाज के उत्थान और अधिकारों की रक्षा के लिए काम करता है। संगठन का स्पष्ट मत है कि जो भी सरकार बने, उसे संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के आधार पर हर वर्ग के हितों की रक्षा करनी चाहिए। महाज़ यह उम्मीद करता है कि दिल्ली की जनता का जो भी निर्णय होगा, वह जनहित में होगा। अगर बीजेपी सत्ता में आती है, तो उसे पसमांदा मुस्लिम समाज के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। यदि आम आदमी पार्टी दोबारा सरकार बनाती है, तो उसे भी अपने पिछले कार्यकाल की नीतियों का विस्तार करते हुए पसमांदा समाज के उत्थान पर ध्यान देना चाहिए। दिल्ली का यह चुनाव न केवल राज्य की राजनीति, बल्कि पूरे देश की राजनीतिक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

निष्कर्ष-

1. अगर बीजेपी सत्ता में आती है, तो उसे पसमांदा समाज के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और राजनीतिक भागीदारी के क्षेत्रों में ठोस नीतियां बनानी होंगी। 2. अगर आम आदमी पार्टी सत्ता में लौटती है, तो उसे पसमांदा बहुल इलाकों में अपनी नीतियों का प्रभावी क्रियान्वयन करना होगा और पसमांदा समाज के लिए विशेष योजनाएं लागू करनी होंगी। 3. ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़ किसी भी दल का समर्थन नहीं करता, बल्कि यह देखेगा कि कौन-सी सरकार पसमांदा समाज के हितों की रक्षा के लिए वास्तविक कदम उठाती है।

आने वाले समय में देखना होगा कि नई सरकार पसमांदा समाज की आकांक्षाओं पर कितना खरा उतरती है। फिलहाल, संगठन यह उम्मीद करता है कि जनता का फैसला दिल्ली और देश के हित में होगा।

मुहम्मद युनुस चीफ़

एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर

ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़