
पसमांदा समाज के उत्थान के लिए संगठित प्रयास जरूरी : मारूफ अंसारी
पसमांदा समाज को मुख्यधारा में लाने पर जोर, युवाओं से जागरूक बनने की अपील
लखनऊ। आल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज के राष्ट्रीय कार्यालय, लखनऊ में पसमांदा मुस्लिम आंदोलन के अग्रदूत मौलाना अली हुसैन आसिम बिहारी की 136वीं जयंती बड़े ही धूमधाम और सम्मान के साथ मनाई गई।
इस अवसर पर राष्ट्रीय प्रधान महासचिव मारूफ अंसारी ने कहा कि मौलाना आसिम बिहारी पसमांदा मुस्लिम समाज के प्रमुख चेहरा और दूरदर्शी सामाजिक चिंतक थे। उन्होंने बताया कि उनका जन्म 15 अप्रैल 1890 को बिहार शरीफ में एक साधारण बुनकर परिवार में हुआ था और उन्होंने पसमांदा मुसलमानों के अधिकारों तथा शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया।
कार्यक्रम में उपस्थित सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों और युवाओं ने उनके विचारों को आज के समय में भी अत्यंत प्रासंगिक बताया। मारूफ अंसारी ने कहा कि मौलाना आसिम बिहारी ने पिछड़े मुस्लिम समाज को संगठित करने और शिक्षा के माध्यम से आगे बढ़ाने की जो राह दिखाई, वही आज भी मार्गदर्शक है। उन्होंने कहा, “मौलाना आसिम बिहारी केवल एक धार्मिक व्यक्तित्व नहीं थे, बल्कि सामाजिक क्रांति के प्रतीक थे, जिन्होंने पसमांदा समाज को पहचान दिलाने का काम किया।”
इस अवसर पर यह संकल्प लिया गया कि उनके बताए रास्तेकृशिक्षा, सामाजिक न्याय और एकताकृपर चलते हुए समाज के कमजोर वर्गों को सशक्त बनाया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय प्रधान महासचिव द्वारा प्रदेश उपाध्यक्ष अकील अहमद अंसारी, प्रदेश सचिव डॉ. जैनुल आबदीन तथा प्रदेश मीडिया प्रभारी बन्ने अली अल्वी को संगठनात्मक जिम्मेदारियां सौंपी गईं।
लखनऊ जिला अध्यक्ष फैज मोहम्मद ने कहा कि समाज के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा, जागरूकता और आपसी एकता बेहद जरूरी है। उन्होंने पसमांदा मुसलमानों को देश की मुख्यधारा में लाने के लिए संगठित प्रयासों पर जोर देते हुए युवाओं से अपील की कि वे आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक मुद्दों के प्रति भी जागरूक रहें। उन्होंने यह भी कहा कि समाज में फैली पिछड़ेपन की समस्या को दूर करने के लिए सरकारी योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है, जिसके लिए सामाजिक संगठनों और स्थानीय नेतृत्व को मिलकर कार्य करना होगा।

