नाज़िया इलाही खान की कथित आपत्तिजनक टिप्पणी की निंदा, कानूनी कार्रवाई की मांग

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड सहित अन्य मुस्लिम संगठनों से मूल सामाजिक मुद्दों पर ध्यान देने की अपील

अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में दिल्ली में होगा ऑल इंडिया पसमांदा उलेमा बोर्ड का राष्ट्रीय महासम्मेलन

नई दिल्ली / लखनऊ। ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़ की एक महत्वपूर्ण ऑनलाइन बैठक राष्ट्रीय अध्यक्ष जनाब परवेज़ हनीफ़ साहब की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक का संचालन संगठन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) जनाब मुहम्मद युनुस ने किया। बैठक में देश के विभिन्न राज्यों से संगठन के पदाधिकारी, उलेमा, सामाजिक कार्यकर्ता एवं बुद्धिजीवी शामिल हुए। वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों, मुस्लिम समाज के समक्ष मौजूद चुनौतियों तथा संगठन के आगामी कार्यक्रमों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि आज पसमांदा मुस्लिम समाज अनेक सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे समय में समाज को वास्तविक मुद्दों पर एकजुट करने की आवश्यकता है, जबकि कुछ लोग धार्मिक भावनाओं को भड़काने वाले विवादों के माध्यम से सामाजिक वातावरण को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं।

बैठक में नाज़िया इलाही खान द्वारा पैगंबर हज़रत मुहम्मद ﷺ एवं उम्मुल मोमिनीन हज़रत आयशा (रज़ि.) के संबंध में की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों की कड़ी निंदा की गई। वक्ताओं ने कहा कि किसी भी धर्म, उसके पैगंबरों, महापुरुषों अथवा पूजनीय व्यक्तित्वों के प्रति अपमानजनक भाषा का प्रयोग अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं, बल्कि सामाजिक सौहार्द को आहत करने वाला कृत्य है। संगठन ने इस मामले में कानून के दायरे में रहकर उचित कार्रवाई की मांग की तथा संबंधित एजेंसियों से निष्पक्ष जांच और आवश्यक कानूनी कदम उठाने की अपील की।

बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया संविधान और कानून के दायरे में रहकर ही होनी चाहिए। संगठन ने समाज से शांति, संयम और लोकतांत्रिक तरीकों से अपनी बात रखने की अपील की तथा कहा कि नफरत का जवाब नफरत से नहीं, बल्कि संवाद, धैर्य और संवैधानिक व्यवस्था के माध्यम से दिया जाना चाहिए।

बैठक के दूसरे प्रमुख विषय के रूप में मुस्लिम समाज का प्रतिनिधित्व करने का दावा करने वाले विभिन्न संगठनों की भूमिका पर चर्चा हुई। इस दौरान ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, जमीयत उलेमा-ए-हिंद, जमात-ए-इस्लामी हिंद, दारुल उलूम देवबंद, इमारत-ए-शरिया, ताजुश्शरिया तथा अन्य मुस्लिम संगठनों से यह प्रश्न किया गया कि उन्होंने वर्षों के दौरान पसमांदा मुस्लिम समाज की शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सामाजिक न्याय, सामाजिक बराबरी और आर्थिक सशक्तिकरण जैसे मूलभूत मुद्दों पर अपेक्षित स्तर पर ठोस कार्य क्यों नहीं किया।

मुख्य कार्यकारी अधिकारी जनाब मुहम्मद युनुस ने कहा कि यह समय समाज को भावनात्मक और विवादित विषयों में उलझाने का नहीं, बल्कि शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास, सामाजिक न्याय और संवैधानिक अधिकारों जैसे वास्तविक मुद्दों पर गंभीरता से काम करने का है। उन्होंने कहा कि देश में यदि कुछ लोग नफरत फैलाने का प्रयास कर रहे हैं तो उसका समाधान नफरत नहीं, बल्कि धैर्य, संवाद, सामाजिक जागरूकता और संवैधानिक मार्ग है। समाज को भड़काने के बजाय सकारात्मक नेतृत्व की आवश्यकता है।

वक्ताओं ने कहा कि पसमांदा मुस्लिम समाज अब अपने अधिकारों, सम्मान और समान भागीदारी के प्रति अधिक जागरूक हो चुका है। समाज केवल भावनात्मक नारों से नहीं, बल्कि शिक्षा, समान अवसर, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय पर आधारित वास्तविक परिवर्तन चाहता है।

बैठक के तीसरे एजेंडे के अंतर्गत सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि ऑल इंडिया पसमांदा उलेमा बोर्ड का राष्ट्रीय महासम्मेलन आगामी अक्टूबर माह के अंतिम सप्ताह में दिल्ली में आयोजित किया जाएगा। इस महासम्मेलन में देशभर से उलेमा, बुद्धिजीवी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं पसमांदा समाज के प्रतिनिधि भाग लेंगे। सम्मेलन का उद्देश्य सामाजिक न्याय, शिक्षा, राष्ट्रीय एकता, भाईचारे और संवैधानिक अधिकारों के प्रश्नों पर राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर विमर्श को आगे बढ़ाना होगा।

बैठक में महासम्मेलन की तैयारियों की समीक्षा भी की गई। विभिन्न राज्यों के पदाधिकारियों ने संगठन के विस्तार, सदस्यता अभियान तथा गांव-गांव और शहर-शहर तक संगठन को मजबूत करने के संबंध में अपने सुझाव प्रस्तुत किए।

बैठक के समापन पर राष्ट्रीय अध्यक्ष जनाब परवेज़ हनीफ़ साहब ने कहा कि ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़ संविधान, लोकतंत्र, सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय एकता के सिद्धांतों के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है। संगठन का उद्देश्य समाज में नफरत फैलाना नहीं, बल्कि न्याय, बराबरी, भाईचारा और गंगा-जमुनी तहज़ीब को मजबूत करना है।

अंत में सभी पदाधिकारियों ने यह संकल्प लिया कि पसमांदा समाज के अधिकारों, सम्मान, शिक्षा, सामाजिक न्याय और उचित प्रतिनिधित्व के लिए लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से संघर्ष को और अधिक सशक्त बनाया जाएगा तथा देश में अमन, भाईचारे और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने के लिए निरंतर कार्य किया जाएगा।