अनुच्छेद 341 से धार्मिक प्रतिबंध हटाने की मांग

दलितों के अधिकार धर्म बदलने से समाप्त नहीं होते: इलियास
दलित मुस्लिम और ईसाई समुदाय को भी मिले एस. सी. का लाभ: मारूफ अंसारी
सामाजिक पिछड़ेपन को धर्म से नहीं जोड़ा जाना चाहिए: पसमांदा महाज़

लखनऊ। ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़ ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 341 के तहत अनुसूचित जाति की पहचान को धर्म से जोड़ने वाले प्रावधान में संशोधन कर दलित मुसलमानों और दलित ईसाइयों को अनुसूचित जाति का लाभ दिए जाने की मांग उठाई है। संगठन के राष्ट्रीय महासचिव मारूफ अंसारी ने संगठन के पदाधिकारियों के साथ लखनऊ जिलाधिकारी के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपकर अनुच्छेद 341 में लगे धार्मिक प्रतिबंध को समाप्त करने की मांग की।
मारूफ अंसारी ने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 16, 21 और 25 प्रत्येक नागरिक को समानता, भेदभाव से संरक्षण, अवसर की समानता, जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता तथा धार्मिक स्वतंत्रता जैसे मौलिक अधिकार प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद 10 अगस्त 1950 को जारी राष्ट्रपति आदेश के तहत अनुसूचित जाति की पहचान को धर्म से जोड़ दिया गया, जिसके कारण प्रारंभ में केवल हिंदू दलितों को अनुसूचित जाति का लाभ मिला और अन्य धर्मों के दलित इससे वंचित रह गए।
प्रदेश महासचिव इलियास ने कहा कि वर्ष 1956 में सिख समुदाय और वर्ष 1990 में बौद्ध समुदाय को अनुसूचित जाति के दायरे में शामिल किया गया, लेकिन दलित मुसलमान और दलित ईसाई आज भी इस लाभ से वंचित हैं। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की सामाजिक एवं ऐतिहासिक स्थिति उसके धार्मिक विश्वास अथवा पूजा-पद्धति बदलने से समाप्त नहीं हो जाती। सामाजिक पिछड़ेपन और ऐतिहासिक वंचना के आधार पर मिलने वाले अधिकारों को धर्म के आधार पर सीमित नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि संगठन का मानना है कि अनुसूचित जाति से जुड़े अधिकारों के निर्धारण में सामाजिक एवं ऐतिहासिक वंचना को आधार बनाया जाना चाहिए। यह समानता और सामाजिक न्याय के संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप होगा।
ज्ञापन के माध्यम से महाज़ ने राष्ट्रपति से अनुच्छेद 341 के तहत लगे धार्मिक प्रतिबंध को समाप्त करने तथा दलित मुसलमानों और दलित ईसाइयों को अनुसूचित जाति की सूची में शामिल करने की दिशा में आवश्यक स्वीकृति एवं संस्तुति प्रदान करने की अपील की। ज्ञापन की प्रतिलिपि प्रधानमंत्री, केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री तथा केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री को भी सूचनार्थ भेजी गई है।
ज्ञापन सौंपने के दौरान संगठन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की संख्या अधिक होने के कारण अधिकांश लोगों को जिलाधिकारी कार्यालय के अंदर जाने की अनुमति नहीं मिल सकी। प्रतिनिधिमंडल ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत ज्ञापन सौंपा।
इस अवसर पर लखनऊ जिला अध्यक्ष फैज मोहम्मद, शकील लेड़ी, एहतेशाम सहित संगठन के अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।