अलीगढ़ में AIPMM और BAMCEF के संयुक्त तत्वावधान में हुआ “पसमांदा संवाद”

  • शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और आर्थिक विकास के मुद्दों पर पसमांदा संवाद में मंथन
  • पसमांदा समाज की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को व्यापक सामाजिक न्याय के विमर्श से जोड़ने पर जोर
  • OBC, दलित, ST एवं अन्य वंचित वर्गों के साझा मुद्दों पर संवाद और सहयोग की पहल
  • “संवाद का अर्थ समर्थन नहीं और असहमति का अर्थ दूरी नहीं” — AIPMM

अलीगढ़। मेव चौपाल, जोहरा बाग, दौधपुर, अलीगढ़ में ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़ (AIPMM) एवं BAMCEF के संयुक्त तत्वावधान में “पसमांदा संवाद” कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य पसमांदा समाज सहित वंचित एवं पिछड़े वर्गों के सामाजिक, शैक्षिक, आर्थिक एवं संवैधानिक मुद्दों पर सार्थक संवाद स्थापित करना तथा सामाजिक न्याय, समान अवसर और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श करना था।
कार्यक्रम में AIPMM एवं BAMCEF के प्रतिनिधिमंडलों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आर्थिक विकास, सामाजिक न्याय, संवैधानिक अधिकार एवं सामाजिक-राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे विषयों पर विचार साझा किए।
AIPMM प्रतिनिधिमंडल की सहभागिता- AIPMM प्रतिनिधिमंडल में मुहम्मद यूनुस, मुख्य कार्यकारी अधिकारी; इंजी. अख्तर हुसैन, राष्ट्रीय सलाहकार; नफीस मंसूरी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं दिल्ली प्रदेश प्रभारी; डॉ. शारिद जमाल अंसारी, प्रदेश अध्यक्ष, दिल्ली; डॉ. रैहान असरारी, प्रदेश कार्यकारी महासचिव; तथा एडवोकेट सज्जाद हुसैन अंसारी, प्रदेश प्रभारी एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष, लीगल सेल शामिल रहे।
सवाल-जवाब सत्र में मुहम्मद यूनुस ने मुस्लिम समाज के भीतर मौजूद OBC, दलित, ST एवं अन्य पिछड़े-वंचित समूहों की सामाजिक एवं आर्थिक परिस्थितियों को सामाजिक न्याय के व्यापक विमर्श में शामिल किए जाने का महत्वपूर्ण प्रश्न उठाया। BAMCEF की ओर से RSS द्वारा इस मुद्दे के संभावित इस्तेमाल की आशंका व्यक्त की गई, जिस पर AIPMM ने कहा कि किसी सामाजिक वास्तविकता पर चर्चा केवल इस आशंका के कारण सीमित नहीं की जानी चाहिए। संगठन के अनुसार समस्याओं की पहचान और उनके लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक समाधान की तलाश सामाजिक न्याय का आवश्यक हिस्सा है।
AIPMM ने स्पष्ट किया कि संगठन किसी भी सांप्रदायिक, भेदभावपूर्ण या विभाजनकारी दृष्टिकोण का समर्थन नहीं करता। संगठन का उद्देश्य शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आर्थिक सशक्तिकरण, सामाजिक सम्मान, समान अवसर, राजनीतिक एवं संस्थागत प्रतिनिधित्व तथा संवैधानिक अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाना है।
संगठन ने कहा कि संवाद का अर्थ समर्थन नहीं और असहमति का अर्थ दूरी नहीं है। AIPMM सरकार, प्रशासन, सामाजिक संगठनों एवं विभिन्न विचारधाराओं से जुड़े मंचों के साथ पसमांदा समाज के हितों से संबंधित मुद्दों पर संवाद जारी रखने में विश्वास करता है। OBC, दलित, ST एवं अन्य वंचित वर्गों के बीच साझा मुद्दों पर संवाद और सहयोग को भी सामाजिक न्याय के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।
Common Minimum Programme पर संवाद- कार्यक्रम में AIPMM एवं BAMCEF के बीच सामाजिक न्याय, शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, आर्थिक विकास और वंचित वर्गों के अधिकारों से जुड़े Common Minimum Programme जैसे साझा मुद्दों पर आगे संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
AIPMM ने कहा कि यदि किसी संस्था, संगठन या सामाजिक मंच के साथ संवाद के माध्यम से पसमांदा समाज के बच्चों की शिक्षा, युवाओं के रोजगार, स्वास्थ्य सुविधाओं, आर्थिक विकास अथवा सामाजिक-राजनीतिक हिस्सेदारी के अवसर बेहतर हो सकते हैं, तो ऐसे प्रत्येक सकारात्मक संवाद को आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
कार्यक्रम के अंत में आभार- कार्यक्रम के अंत में दुबई से आए AIPMM के राष्ट्रीय सलाहकार इंजी. अख्तर हुसैन ने BAMCEF प्रतिनिधिमंडल, AIPMM के प्रतिनिधिमंडल तथा विशेष रूप से जहीर अहमद एवं इंजीनियर आदिल खान सहित कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग करने वाले सभी लोगों का धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया।
AIPMM ने कहा कि अलीगढ़ का “पसमांदा संवाद” विभिन्न सामाजिक प्रश्नों पर खुलकर चर्चा और मतभेदों के बावजूद लोकतांत्रिक संवाद को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण प्रयास रहा। संगठन भविष्य में भी सामाजिक न्याय, समान अवसर, संवैधानिक अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आर्थिक विकास से जुड़े मुद्दों पर सभी सकारात्मक एवं लोकतांत्रिक मंचों के साथ संवाद जारी रखेगा।