शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सम्मान और राजनीतिक भागीदारी के अधिकारों के लिए संगठित प्रयास का आह्वान!
आजमगढ़। जिले के मुबारकपुर स्थित कपूरा शाह दीवान की बाग ग्राउंड में ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़ के तत्वावधान में पसमांदा अधिकार सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में पसमांदा समाज की सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक और राजनीतिक स्थिति पर विस्तार से चर्चा की
गई तथा समाज को अपने संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रति जागरूक होकर संगठित प्रयास करने का आह्वान किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता मौलाना रेहान अंसारी ने की, जबकि मंच संचालन जनाब उस्मान हलालखोर ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ ऑल इंडिया पसमांदा उलमा बोर्ड के राष्ट्रीय संगठन मंत्री मौलाना अब्दुल रकीब अंसारी ने कुरआन-ए-पाक की तिलावत और नात-ए-नबी ﷺ से किया।
सम्मेलन में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ताओं, उलेमा, बुद्धिजीवियों और पसमांदा समाज से जुड़े लोगों ने भाग लिया। दर्जनों वक्ताओं ने अपने विचार रखते हुए कहा कि पसमांदा अधिकार सम्मेलन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि अपने अधिकारों, सम्मान और बराबरी के लिए जागरूकता की आवाज है।
वक्ताओं ने कहा कि पसमांदा समाज की तरक्की केवल नारों से संभव नहीं है। इसके लिए शिक्षा, संगठन, संवैधानिक अधिकारों की जानकारी, आर्थिक आत्मनिर्भरता और लोकतांत्रिक भागीदारी को मजबूत करना जरूरी है। सम्मेलन में इस बात पर जोर दिया गया कि समाज के कमजोर और पिछड़े तबकों को अपने अधिकारों की जानकारी हो तथा सरकारी योजनाओं और संवैधानिक प्रावधानों का लाभ लेने के लिए कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को समझना चाहिए।
भारतीय संविधान नागरिकों को समानता का अधिकार देता है और सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों की उन्नति के लिए विशेष प्रावधानों की अनुमति देता है। संविधान का अनुच्छेद 16(4) राज्य को ऐसे पिछड़े वर्गों के लिए सरकारी सेवाओं में आरक्षण का प्रावधान करने की अनुमति देता है, जो राज्य की सेवाओं में पर्याप्त रूप से प्रतिनिधित्व नहीं रखते।
सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि पसमांदा समाज की वास्तविक तरक्की की बुनियाद शिक्षा है। हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा और रोजगारपरक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के लिए समाज और सरकार दोनों स्तरों पर गंभीर प्रयास जरूरी हैं।
वक्ताओं ने कहा कि गरीब परिवारों के बच्चों को पढ़ाई बीच में छोड़ने से रोकना, छात्रवृत्ति एवं सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाना, प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मार्गदर्शन उपलब्ध कराना और युवाओं को आधुनिक कौशल से जोड़ना समय की आवश्यकता है।
रोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता पर जोर
सम्मेलन में पसमांदा समाज के पारंपरिक कारीगरों, छोटे व्यापारियों, मजदूरों और स्वरोजगार से जुड़े लोगों की आर्थिक स्थिति पर भी चर्चा की गई। मौलाना रेहान अंसारी ने कहा कि केवल सरकारी नौकरी ही रोजगार का एकमात्र रास्ता नहीं है; कौशल विकास, स्वरोजगार, छोटे उद्योग, कारोबार, आधुनिक तकनीक और सरकारी आर्थिक योजनाओं तक पहुंच को भी मजबूत किया जाना चाहिए।
उत्तर प्रदेश में विभिन्न सरकारी योजनाओं में OBC, अल्पसंख्यक, महिला तथा अन्य श्रेणियों के लिए निर्धारित प्रावधान मौजूद हैं; उदाहरण के तौर पर राज्य की एक 2026-27 योजना में विशेष श्रेणियों के लाभार्थियों में OBC और minorities को शामिल किया गया है।
राजनीतिक भागीदारी भी जरूरी
वक्ताओं ने कहा कि पसमांदा समाज को लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी भागीदारी बढ़ाने की जरूरत है। इसका अर्थ केवल चुनाव लड़ना नहीं, बल्कि पंचायत, नगर निकाय, विधानसभा, संसद, सामाजिक संस्थाओं और नीति-निर्माण की प्रक्रियाओं में अपनी आवाज को प्रभावी ढंग से रखना है।
उन्होंने कहा कि समाज को अपनी समस्याओं का तथ्यात्मक दस्तावेज तैयार करना चाहिए, स्थानीय प्रशासन के समक्ष समस्याएं उठानी चाहिए और जहां आवश्यक हो वहां संवैधानिक एवं कानूनी माध्यमों का इस्तेमाल करना चाहिए।
सम्मेलन में यह संदेश भी दिया गया कि अधिकारों की लड़ाई लोकतांत्रिक, शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से आगे बढ़ाई जानी चाहिए। समाज में शिक्षा, आपसी भाईचारा, सामाजिक समरसता और कानून के प्रति सम्मान को मजबूत करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
वक्ताओं ने कहा कि अधिकार केवल मांगने से नहीं, बल्कि जागरूकता, संगठन, शिक्षा और निरंतर लोकतांत्रिक प्रयास से मजबूत होते हैं। इसके लिए गांव-गांव और मोहल्ले-मोहल्ले में जागरूकता अभियान चलाने, युवाओं को संगठन से जोड़ने तथा महिलाओं और विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ाने की जरूरत है।
कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर मौलाना अब्दुल रकीब अंसारी ने कुरआन की तिलावत और नात-ए-नबी ﷺ के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की। सम्मेलन में पसमांदा समाज के बीच शिक्षा, संगठन और अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
वक्ताओं ने कहा कि पसमांदा समाज को अपनी ताकत अपनी एकता, शिक्षा और संवैधानिक व्यवस्था में रखनी चाहिए। समाज के लोगों को अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों की भी जानकारी होनी चाहिए।
सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि अलग-अलग क्षेत्रों में बिखरे हुए सामाजिक प्रयासों को एक मंच पर लाकर एक सकारात्मक और रचनात्मक दिशा में आगे बढ़ाना जरूरी है। इसके लिए जिला, ब्लॉक और गांव स्तर पर संगठन को मजबूत करने, सदस्यता अभियान चलाने तथा स्थानीय समस्याओं का रिकॉर्ड तैयार करने पर जोर दिया गया।
सम्मेलन का संदेश स्पष्ट रहा कि पसमांदा समाज की लड़ाई किसी दूसरे समाज के खिलाफ नहीं, बल्कि शिक्षा, बराबरी, सम्मान, अवसर और संवैधानिक अधिकारों के लिए है।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने शिक्षा को प्राथमिकता देने, युवाओं को आगे बढ़ाने, महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने, सरकारी योजनाओं की जानकारी समाज तक पहुंचाने और लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से अपने अधिकारों के लिए आवाज बुलंद करने का संकल्प व्यक्त किया।

