“लकुम दीनुकुम वलिय दीन” नेशनल कॉन्फ्रेंस में शिरकत की पुरज़ोर अपील

ऑल इंडिया पसमांदा उलेमा बोर्ड
दिनांक: 29 नवंबर 2026 (रविवार)
स्थान: इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर (IICC), लोधी रोड, नई दिल्ली

अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाहि व बरकातुहू!

तमाम उलेमाए किराम, इमाम हज़रात, सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों, विचारकों, नौजवानों तथा ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़ के सभी पदाधिकारियों से पुरख़ुलूस गुज़ारिश है कि वे 29 नवंबर 2026 को इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर, नई दिल्ली में आयोजित होने वाली “लकुम दीनुकुम वलिय दीन” नेशनल कॉन्फ्रेंस में अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराकर इसे कामयाब बनाएं। इस राष्ट्रीय सम्मेलन में देश के कोने-कोने से उलेमाए किराम, पसमांदा समाज के प्रतिनिधि, ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़ के पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी एवं विचारक शिरकत करेंगे। यह सम्मेलन केवल एक संगठनात्मक कार्यक्रम नहीं, बल्कि पसमांदा समाज में शिक्षा, जागरूकता, सामाजिक न्याय, आर्थिक विकास, आपसी भाईचारे और संवैधानिक अधिकारों के प्रति नई चेतना पैदा करने की एक महत्वपूर्ण पहल है।

1. ऑल इंडिया पसमांदा उलेमा बोर्ड के गठन की आवश्यकता- ऑल इंडिया पसमांदा उलेमा बोर्ड के गठन का प्रमुख उद्देश्य पसमांदा उलेमाओं को एक स्वतंत्र, संगठित और प्रभावी मंच प्रदान करना है, ताकि वे अपनी समस्याओं, विचारों और समाज की आवश्यकताओं को मजबूती के साथ सामने रख सकें। लंबे समय से मुस्लिम समाज के विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों में पसमांदा उलेमाओं को उनकी आबादी, सामाजिक स्थिति और प्रतिभा के अनुरूप प्रतिनिधित्व नहीं मिलने की शिकायतें सामने आती रही हैं। अनेक पसमांदा उलेमा धार्मिक ज्ञान, तक़वा, सामाजिक सेवा और शैक्षिक योग्यता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं, इसके बावजूद उन्हें नेतृत्व और निर्णय प्रक्रिया में पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाते। सामाजिक स्तर पर व्याप्त जातिगत भेदभाव और ऊंच-नीच की मानसिकता ने भी पसमांदा समाज की तरक्की के रास्ते में बाधाएं पैदा की हैं। इस स्थिति में आवश्यक है कि पसमांदा उलेमा अपनी स्वतंत्र पहचान, सामूहिक नेतृत्व और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ आगे आएं।

हमारा उद्देश्य किसी समुदाय, वर्ग या उलेमा के विरुद्ध खड़ा होना नहीं, बल्कि पसमांदा उलेमाओं को उनका उचित सम्मान, प्रतिनिधित्व और अवसर दिलाना है। हमारा विश्वास है कि धार्मिक ज्ञान, तक़वा, योग्यता और सामाजिक सेवा का मूल्यांकन जाति के आधार पर नहीं, बल्कि इंसान के किरदार और उसके योगदान के आधार पर होना चाहिए।

2. सरकारी योजनाओं और प्रतिनिधित्व में पसमांदा उलेमाओं की भागीदारी- पसमांदा समाज की अनेक समस्याओं पर सरकारी स्तर पर चर्चा और समाधान के लिए एक संगठित प्रतिनिधिमंडल तथा प्रभावी मंच की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जाती रही है। पहले पसमांदा उलेमाओं का कोई व्यापक और संगठित राष्ट्रीय मंच नहीं होने के कारण उनकी आवाज़ संबंधित सरकारी संस्थाओं और निर्णय लेने वाले मंचों तक प्रभावी ढंग से नहीं पहुंच पाती थी। ऑल इंडिया पसमांदा उलेमा बोर्ड का प्रयास होगा कि पसमांदा उलेमाओं और समाज के प्रतिनिधियों को सरकारी संस्थाओं, आयोगों तथा संबंधित विभागों के साथ संवाद के अवसर मिलें। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सरकारी योजनाओं, सामाजिक सुरक्षा और प्रतिनिधित्व से जुड़े मुद्दों पर सरकार के समक्ष तथ्यपरक ढंग से अपनी बात रखी जाए। हम चाहते हैं कि पसमांदा समाज की वास्तविक समस्याओं को सुना जाए और सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचे। इसके लिए संविधान के दायरे में रहकर संवाद, ज्ञापन, प्रतिनिधिमंडल और लोकतांत्रिक तरीकों से प्रयास किए जाएंगे।

3. पसमांदा बच्चों की शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य- आज शिक्षा किसी भी समाज की तरक्की की सबसे मजबूत बुनियाद है। समाज के सभी वर्गों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण आधुनिक शिक्षा, तकनीकी ज्ञान और उच्च शिक्षा के समान अवसर मिलने चाहिए। यह चिंता का विषय है कि पसमांदा समाज के अनेक बच्चे आर्थिक तंगी, जागरूकता की कमी और शैक्षिक संसाधनों के अभाव में उच्च शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। वहीं, समाज के संपन्न परिवार अपने बच्चों को देश-विदेश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में पढ़ाने के अवसर प्राप्त कर पाते हैं। हमारा उद्देश्य मदरसों की धार्मिक शिक्षा का विरोध करना नहीं, बल्कि उसके साथ आधुनिक शिक्षा के अवसरों को भी बढ़ावा देना है, ताकि पसमांदा समाज के बच्चे दीन की तालीम के साथ-साथ विज्ञान, तकनीक, चिकित्सा, इंजीनियरिंग, कानून, प्रशासन और अन्य क्षेत्रों में भी आगे बढ़ सकें। ऑल इंडिया पसमांदा उलेमा बोर्ड के माध्यम से निम्नलिखित विषयों पर सरकार एवं संबंधित संस्थाओं से संवाद किया जाएगा:

🔹 पसमांदा विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति और शैक्षिक सहायता।

🔹 गरीब एवं जरूरतमंद बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अवसर।

🔹 प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग और मार्गदर्शन।

🔹 तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा को प्रोत्साहन।

🔹 मदरसों के विद्यार्थियों के लिए आधुनिक शिक्षा और कौशल विकास के अवसर।

🔹 छोटे कारोबार एवं स्वरोजगार के लिए पात्र लोगों को ऋण तथा सरकारी योजनाओं की जानकारी।

🔹 पसमांदा समाज के युवाओं के लिए रोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता के अवसर।

हमारा संकल्प है कि कोई भी प्रतिभाशाली बच्चा केवल गरीबी, जातिगत भेदभाव या संसाधनों की कमी के कारण अपने सपनों से वंचित न रहे।

4. मस्जिदों और सामाजिक मंचों से शिक्षा, रोजगार एवं भाईचारे का संदेश- उलेमाए किराम और इमाम हज़रात समाज में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। उनकी बातों का लोगों के जीवन और सोच पर गहरा प्रभाव पड़ता है। इसलिए उनसे विशेष अपील है कि वे जुमे के खुत्बों, नमाज़ के बाद की नसीहतों तथा अन्य सामाजिक अवसरों पर शिक्षा, रोजगार, स्वच्छता, स्वास्थ्य, नशामुक्ति, सामाजिक एकता और सकारात्मक सोच जैसे विषयों पर भी लोगों को जागरूक करें। हमारे धार्मिक और सामाजिक मंचों से ऐसे संदेश दिए जाने चाहिए, जो समाज को शिक्षा के प्रति प्रेरित करें, युवाओं में मेहनत और आत्मनिर्भरता की भावना पैदा करें तथा लोगों को आपसी नफरत और भेदभाव से दूर रखें।

जब हम समाज में शिक्षा, सद्भाव और सकारात्मक बदलाव की दिशा में एक कदम बढ़ाएंगे, तो दूसरे समुदायों के लोग भी सहयोग और सहभागिता के लिए आगे आएंगे। इसी आपसी सहयोग से सामाजिक सौहार्द, राष्ट्रीय एकता और भाईचारा मजबूत होगा। पसमांदा उलेमाओं से यह भी अपील है कि वे अपने समाज के लोगों को भारतीय संविधान, नागरिक अधिकारों, कर्तव्यों और लोकतांत्रिक व्यवस्था के बारे में जागरूक करें, ताकि लोग अपने अधिकारों को समझें और देश के विकास में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं।

5. सामाजिक न्याय और आर्थिक विकास के लिए संगठित प्रयास- पसमांदा समाज की तरक्की केवल धार्मिक या सामाजिक जागरूकता तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसके लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आर्थिक विकास और सरकारी संस्थाओं में उचित प्रतिनिधित्व जैसे सभी क्षेत्रों में योजनाबद्ध प्रयास आवश्यक हैं। ऑल इंडिया पसमांदा उलेमा बोर्ड, ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़ के सहयोग से, इन विषयों पर जनजागरूकता अभियान चलाने तथा संबंधित सरकारी विभागों से संवाद करने का प्रयास करेगा।

हमारी प्रमुख मांगें और प्राथमिकताएं हैं:

1. शिक्षा के क्षेत्र में पसमांदा समाज के लिए बेहतर अवसर और आवश्यक सहायता।
2. स्वास्थ्य सेवाओं एवं सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं तक जरूरतमंदों की पहुंच।
3. युवाओं के लिए रोजगार, कौशल विकास और स्वरोजगार के अवसर।
4. छोटे कारोबारियों एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए योजनाओं का लाभ।
5. सामाजिक न्याय और जातिगत भेदभाव के विरुद्ध जागरूकता।
6. सरकारी आयोगों, संस्थाओं और निर्णय प्रक्रिया में उचित प्रतिनिधित्व।
7. पसमांदा महिलाओं और युवाओं की शिक्षा, सुरक्षा एवं सामाजिक भागीदारी।
8. संविधान के अनुरूप समानता, सम्मान और अवसरों की उपलब्धता।

इन उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए समाज के सभी वर्गों को मिलकर काम करना होगा।

6. ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़ का सहयोग- ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़, पसमांदा समाज की शिक्षा, सामाजिक न्याय, आर्थिक विकास और संवैधानिक अधिकारों के लिए प्रतिबद्ध है। ऑल इंडिया पसमांदा उलेमा बोर्ड इसी व्यापक सामाजिक उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए उलेमाओं को एक साझा मंच प्रदान करने की पहल है। महाज़ के सभी राष्ट्रीय, प्रदेश, जिला एवं अन्य पदाधिकारियों से अपील है कि वे इस सम्मेलन को सफल बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं और अपने-अपने क्षेत्रों से उलेमाओं, इमामों, बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, युवाओं तथा जागरूक नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करें। यह समय आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर शिक्षा, सामाजिक न्याय, भाईचारे और समाज की भावी पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए एकजुट होने का है।

7. अफवाहों से बचें, संगठन के उद्देश्यों को समझें- कुछ लोगों द्वारा ऑल इंडिया पसमांदा उलेमा बोर्ड को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) या भारतीय जनता पार्टी (BJP) से जोड़कर प्रस्तुत किए जाने और इसे लेकर विभिन्न प्रकार की चर्चाएं किए जाने की जानकारी सामने आई है। इस संबंध में हमारा स्पष्ट पक्ष है कि ऑल इंडिया पसमांदा उलेमा बोर्ड किसी राजनीतिक दल का संगठन नहीं है और न ही किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध के लिए गठित किया गया है। बोर्ड का उद्देश्य पसमांदा उलेमाओं को संगठित करना, समाज में शिक्षा एवं जागरूकता बढ़ाना, सामाजिक न्याय के मुद्दों को उठाना और सरकार तथा संबंधित संस्थाओं के साथ संवाद के माध्यम से समाज की समस्याओं का समाधान तलाशना है। हम किसी भी राजनीतिक दल के साथ संगठनात्मक गठबंधन या संबद्धता के आधार पर काम नहीं करते। हमारा संवाद जनहित के मुद्दों पर संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक तरीके से संबंधित पक्षों के साथ हो सकता है। हम सभी साथियों से अपील करते हैं कि वे किसी भी अपुष्ट सूचना या अफवाह पर विश्वास करने के बजाय संगठन के घोषित उद्देश्यों, कार्यक्रमों और आधिकारिक वक्तव्यों के आधार पर अपनी राय बनाएं। हमारा समर्थन किसी व्यक्ति या दल के प्रति अंधसमर्थन नहीं, बल्कि शिक्षा, रोजगार, सामाजिक न्याय, आर्थिक विकास, संवैधानिक अधिकारों और पसमांदा समाज की उचित भागीदारी जैसे मुद्दों के प्रति है। जो भी सरकार या जनप्रतिनिधि इन विषयों पर सकारात्मक पहल करे, उससे संवाद करना हमारा लोकतांत्रिक अधिकार और सामाजिक दायित्व है।

8. आइए, एक नई शुरुआत का संकल्प लें!- तमाम उलेमाए किराम, इमाम हज़रात, सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों, विचारकों, नौजवानों और पसमांदा समाज के जागरूक साथियों से एक बार फिर पुरज़ोर अपील है कि वे 29 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित होने वाली “लकुम दीनुकुम वलिय दीन” नेशनल कॉन्फ्रेंस में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें। अपने बच्चों, नौजवानों और समाज के अन्य लोगों को भी इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए प्रेरित करें। यह सम्मेलन हमें शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आर्थिक आत्मनिर्भरता, सामाजिक न्याय, संवैधानिक अधिकारों और राजनीतिक भागीदारी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श करने का अवसर प्रदान करेगा। आइए, हम सब मिलकर ऐसा समाज बनाने का संकल्प लें, जहां किसी व्यक्ति की तरक्की में उसकी जाति बाधा न बने, हर बच्चे को शिक्षा मिले, हर जरूरतमंद को अवसर मिले और प्रत्येक नागरिक को सम्मान के साथ जीवन जीने का अधिकार प्राप्त हो। हमारा संदेश स्पष्ट है— शिक्षा हमारी ताकत, एकता हमारी पहचान, सामाजिक न्याय हमारा लक्ष्य और संविधान हमारा मार्गदर्शक है। इंशाअल्लाह, आप सभी के सहयोग, मेहनत और सहभागिता से यह राष्ट्रीय सम्मेलन एक सार्थक पहल साबित होगा और पसमांदा समाज की आवाज़ को नई मजबूती मिलेगी।

आप सभी की गरिमामयी उपस्थिति सादर प्रार्थनीय है।

सादर,

मुहम्मद यूनुस
मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO)
ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़
एवं ऑल इंडिया पसमांदा उलेमा बोर्ड

नारा: शिक्षा • सामाजिक न्याय • समानता • भाईचारा • पसमांदा सशक्तीकरण