गिरिडीह। 14-अप्रैल को अंबेडकर चौक पर बाबा भीमराव अंबेडकर के मूर्ति पर फूल माला अर्पित कर श्रद्धांजलि अर्पित किया गया। फिर अंबेडकर भवन गिरिडीह अफसर कॉलोनी में जयंती समारोह आयोजन किया गया समारोह में डॉक्टर कलीम अंसारी महासचिव ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज ने बाबा साहब के जीवनी पर प्रकाश डाला और पसमांदा समाज और समाज के अंबेडकर मौलाना आसिम अली बिहार के बारे में भी प्रकाश डाला आज का पसमांदा मुसलमान भारत की मूल निवासी है और दलित हिंदुओं का बदला हुआ स्वरूप है जो ब्राह्मण वर्ण व्यवस्था से तंग आकर मुस्लिम धर्म में परिवर्तित हो गया। जिस समस्या से दलित हिंदू ग्रसित हैं उससे ज्यादा दलित मुसलमान जिसे पसमांदा कहते हैं को झेलना पड़ रहा है मुस्लिम दलित आरक्षण बाबा अंबेडकर साहब दिलाना चाहते थे लेकिन स्वर्ण मुस्लिम के कुछ चाटुकार नेहरू के रखैल पुत्र मौलाना आजाद और कुछ शेख सैयद नेता मिलकर 10 अगस्त 1950 को मुस्लिम आरक्षण को कटवा दिया यह कहकर कि मुसलमान में कोई जात-पात नहीं है उच्च नीच नहीं है छुआछूत नहीं है इसका असर आज तक
दलित मुस्लिम झेल रहा है।आरक्षण नहीं मिला। हिन्दु दलित से ज्यादा मुस्लिम दलितों की हालतू खराब है। पसमांदा मुस्लिम हिंदु पिछड़ा,अनुसुचित एवं अनुसुचित जन जाती से कन्धा से कन्धा मिलाकर बाबासाहेब आंबेडकर की संविधान की रक्षा के लिए संघर्षशील है।
डॉ अंबेडकर जयंती : पसमांदा मुसलमान दलित हिन्दुओं का बदला हुआ रूप : डॉ कलीम
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पसमंदा आन्दोलन के जनक आसिम बिहारी की मनाई गई जयंती
What is the History of Pasmanda Movement? All India Pasmanda Muslim Mahaz (AIPMM)
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